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Wednesday, March 23, 2016

इंसानियत खतरे में

लूटेरे खुदा को लूट रहे हैं,
इंसान को लूटने से बचायें तो कैसे,

अपने, अपनों के खून के प्यासे हो गये हैं
गैरों की जान बचाएं तो, बचाएं कैसे?

खुद से खुद डरने लगा है
बीवी-बच्चे को बचायें तो कैसे?

गिरना इंसान की फितरत हो गई है,
इंसानियत को अब बचाएं तो कैसे?
माँ, तुम याद आती हो

माँ,
आज हर पल
याद आती रही
तेरी
कैसे
याद नहीं करता तुझे
जब नींद
मेरी पलक में थी ही नहीं
फिर कौन
मुझे अपनी गोद में
सुलाकर,
बालों में
अंगुलियाँ घुमाकर
नींद के
आगोश  में ले जाता




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