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Thursday, March 31, 2016

मौन

ज्यादा बोलने से
ज्यादा खतरनाक है
बिल्कुल नहीं सुनना
सुनने की आदत
कम बोलना ही नहीं
मौन के करीब होती है।
आत्म-चिंतन

भीतर झांक कर देखना
खत्म करता है, अशांत  मन को
मन की शांति का यह अचूक तरीका
सदियों से मन के भटकाव को
रोकने का नायाब तरीका
जरा पहले क्यूं नहीं आया
बिना संदर्भ
ना मालूम क्यूं
अच्छी चीजें
धूल में दबे होने से रहा में राही को दिखती नहीं 
है। 
 

Wednesday, March 30, 2016

संम्भव 

‘हौसला’ हालात को
बौना बनाता है
धैर्य जीवन से
उलझन मिटाता है
संभव  जीवन को
जीना सिखाता है।

श्रीगणेश 

एक बार
दिल की बात
दिल से
श्रीगणेश  करके तो देखिए
कैसे विघ्नहर्ता
आपके विघ्न को
हरकर
एक दंत
एक लक्ष्य देख कर
गजराज
गज जैसी विषाल
सोच से
चार भुजाधारी
चंहु  ओर प्रकाश  बिखेर कर
लम्बोदर
लम्बी उम्र देखकर
आपके काम को
बिना विघ्न के
कैसे श्रीगणेश  
सम्पन्न कराते हैं।
 

Tuesday, March 29, 2016

साथी

साथ रहकर
परवाह करने से
बेहतर है
साथ रहने का
एहसास कराना
हक़ीकत

चाहत से
मिलती है जिंदगी
जिंदगी चाहत का नाम है
आज इंसान चाहत से दूर
मदहोश  होकर, पैसा बटोरने में,
चाहत की कब्र खेदकर
चाहत को दफनाने में
सारी जिंदगी गुज़ार देता है
होश  में तब आता
जब खुद को क़ब्र में पाता है। 



Monday, March 28, 2016

अतिक्रमण

अतिक्रमण इंसान हटाता है
भाई-चारा निभाता है
प्रकृति भाई-चारा देखती है
भाई को हटाकर, चारा समेटती है।
 विश्व जनसंख्या दिवस

हम एक से
सात अरब हो गए
प्रकृति हमें बोझ नहीं समझती
प्रकृति हमें अपनी खूबसूरती
जल, जमीन, जंगल
दिखाना चाहती है।
हम प्रकृति को बोझ समझ
जल, जमीन, जंगल लीलने लगे
प्रकृति हमें अपनी खूबसूरती नहीं
हमारी बनायी क़ब्रगाह दिखाना चाहती है। 


Sunday, March 27, 2016

अन्न-महिमा

बिना ज्यादा
अन्न उगाए
उसी अन्न से
हजारों भूखों के
पेट भरो
करो सिर्फ इतना
खाने के बाद
थाली
बिना अन्न के छोड़ो
 मध्यस्थता

पक्षकारों का फैसला
पक्षकारों की शर्तो पर
न्यायाधीष के हाथ
यही है,
मध्यस्थता का कमाल
कानून का भय

कानून का भय हो
किन्तु कानून से डरे नहीं
जो कानून तोड़े
वही कानून से डरे।





Saturday, March 26, 2016

एक उम्मीद-नया वर्ष

किस कदर
गुजरी जिंदगी
हमें याद नहीं

हमें ना गम
ना शिकवा
बीती जिंदगी का

माना लाख गलतियाँ
की हमने
सौ जख्म खाये

फिर भी
कोसों दूर रही
मंजिल हमसे !

आज इसी उम्मीद में
अपने आप को
नये वर्ष में ले जाऊँगा

अब हर पल नयी आषा के साथ बिताऊँगा
और कुछ कर दिखाऊँगा
मंजिल तक जरूर पहुँच जाऊँगा।


Friday, March 25, 2016

उपलब्धि

साधारण सी दिखने वाली
उपलब्धि भी
हमें  मंजिल के शिखर तक
पहुँचने  में
सहायक होती है
और राह में पड़ने वाले
अंधेरों को दूर करने में
बड़े प्रकाश  स्तम्भों की तरह
मदद करती है।

 ज्ञान

दुनिया में उतना ही ज्ञान नहीं
जितना हम जानते हैं
इस राज को जिसने
जान लिया
मानो ज्ञान को पहचान लिया।

विशाल भव-सागर में 
गोता लगाकर
जिसने ज्ञान को निकाल लिया
उसी ने ज्ञान को जान लिया। 



Thursday, March 24, 2016

एक बेटी तो होनी चाहिए !

अपनी बेटी के
जन्म दिन में
क्या उपहार दूं
उसे...

ईश्वर  ने मुझे
दुनिया के
सृजन का उपहार दिया है...

मेरे सारे उपहार
बौने हैं
विधाता के इस
उपहार के सामने...

बेटियों का अस्तित्व
बचाये रखना ही
सबसे बड़ा उपहार है
विधाता के लिए...

मैं खुशनसीब  हूं
ईश्वर  ने मुझे बेटी देकर
ईश्वर को धन्यवाद देने का
एक मौका दिया...

यही मेरा उपहार है
बेटी के लिए
ईष्वर उसकी खुषियां
सलामत रखे...


Wednesday, March 23, 2016

इंसानियत खतरे में

लूटेरे खुदा को लूट रहे हैं,
इंसान को लूटने से बचायें तो कैसे,

अपने, अपनों के खून के प्यासे हो गये हैं
गैरों की जान बचाएं तो, बचाएं कैसे?

खुद से खुद डरने लगा है
बीवी-बच्चे को बचायें तो कैसे?

गिरना इंसान की फितरत हो गई है,
इंसानियत को अब बचाएं तो कैसे?
माँ, तुम याद आती हो

माँ,
आज हर पल
याद आती रही
तेरी
कैसे
याद नहीं करता तुझे
जब नींद
मेरी पलक में थी ही नहीं
फिर कौन
मुझे अपनी गोद में
सुलाकर,
बालों में
अंगुलियाँ घुमाकर
नींद के
आगोश  में ले जाता




Tuesday, March 22, 2016

गुरू कृपा

पक्षियों को उड़ते देख
लगता है
जीवन उड़ रहा है
पहाड़ो को देख
लगता है
जीवन ठहर गया है
नदियों को बहता देख
लगता है
जीवन चल रहा है
माँ के प्यार को देख
लगता है
जीवन प्यार भरा है
अपनों के बदलते नज़रिया देख
लगता है,जीवन स्वार्थ भरा है
पत्नि का प्यार देख
लगता है
जीवन समर्पण भरा है
बिटिया की निगाहों में
स्नेह देख
लगता है
जीवन खुशियों  भरा है
पल-पल बदलते रिश्ते  देख
लगता है
जीवन छलावा भरा है
उम्र दर-उम्र बढ़ते देख
लगता है
जीवन नासमझी भरा है
बावन बरस में
गुरूवर आचार्य श्री नानेश  का
‘आत्मसमीक्षण’ अध्ययन कर
लगता है
जीवन कुछ समझ भरा है।


Monday, March 21, 2016

हौसाला

आज एक नन्हीं चिडि़या को
घरौंदे बनाते देखा

भरी बरसात में
तिनके चुनकर सँजोते देखा

चैखट में खड़े रहकर
मंजिल की ओर क़दम न बढ़ा सका

हर पल छाते को ढूंढने में
मन को भटकते देखा

तभी चिडि़या को
एक तिनका घरौंदे में और सँजोते देखा

माना कि मुराद पूरी नहीं हुई मेरी
किंतु क़दम को मंजिल की ओर बढ़ते देखा।


Sunday, March 20, 2016

खुशियाँ 

क्यूँ
हम
खुशियाँ  पाने
दर-दर
भटकते हैं,

प्रकृति
की गोद में
जाकर बैठो
और
देखो

कितनी
खुशियाँ
संजोये
बैठी है
हमारे लिए।



Saturday, March 19, 2016

फासला

गरीब और अमीर के बीच
उतना ही
फासला है,

जितना
जिन्दगी और मौत
के बीच।

अमीर जिन्दगी
चाहता है,
और गरीब मौत

किन्तु
ना अमीर जी पाता
और ना गरीब मर पाता।
हमसफ़र

मैंने
जीवन के सफ़र में
उस रोज से
तुम्हें 
अपना हमसफ़र
मान लिया है,
जब मैंने 
तुम्हें नहीं,
तुम्हारी
परछाई को देखा था।





Friday, March 18, 2016

जि़न्दगी

तेरे साथ जिन्दगी बिताऊँ
ऐसी मेरी किस्मत कहाँ?

तेरे बिना
जिन्दगी गुजारूँ
इतनी मेरी हिम्मत कहाँ?

तेरे बिना भी
तेरे साथ
जीना सिख लिया...

यकीं न हो तो
आकर देख ले पल भर
तेरे ख़्यालों के आगे
बौना बनाया है जीवन को।
 सीख

खुशी  में हर अपने
साथ होना चाहते हैं
न बुलाने पर
नाराज हो जाते हैं

गम में आने से
कतराते हैं
न आने के हजार
बहाने बनाते हैं

आज 
माँ की याद ने
मुझे
एक सीख दे दी है

चलने के लिए कारवां की नहीं
हौसले की जरूरत होती है
और मैं
अकेला चल पड़ा। 



Thursday, March 17, 2016

इंसानियत

इंसानियत के बिना
इंसान
शैतान कहलाता है।

इंसानियत ही
इंसान को
भगवान बनाती है।

प्रकृति की अद्भूत निगाहें

प्रकृति ने
‘आंवला’ और ‘तेंदू’
दोनों को
विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में दिया है

किन्तु 
आंवला को ज्यादा सुंदर
बनाया है,
तेंदू से

यदि तेंदू भी
सुंदर  होता,
आंवले की 
तरह तो
अमीर 
बेवजह
उसे भी
खरीद लाते

फिर 
गरीब
विटामिन-सी
कहाँ से पाते !

Wednesday, March 16, 2016

संबंध

इंसान ने जितना संबंध
भौतिकता से जोड़ा है,
उससे कहीं ज्यादा
अपनों से तोड़ा है।

सत्य का वास्तविकता से
उतना ही सम्बन्ध है,
जितना सम्बन्ध
जीवन का मृत्यु से।
शेरनी

इक्कीसवीं सदी में
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में,
शेरनी के 
अस्तित्व से

बाईसवीं सदी में
इंसान के सुखद
अस्तित्व की कल्पना
की जा सकती है

क्योंकि पर्यावरण संतुलन
की जननी है
शेरनी। 




Tuesday, March 15, 2016

हक

किस-किस का
शुक्रिया अदा करूँ
किस-किस का
एहसां चुकाऊं

पहले ही मेरी
जिन्दगी
एहसानों के बोझ से
लद चुकी है।

तुम मुझे अपना
बनाकर
और ना एहसां
लादो मुझ पर

क्योंकि मरने के
बाद भी
मेरी मिट्टी पर
किसी और का हक़ होगा।
स्वयं के आकलन का तरीका

क्या खोया
महत्वहीन।

अफ़सोस !
ऐसा नहीं होता
ज्यादा पा लेता
ज्यादा महत्वहीन।

क्या बचा है
महत्वपूर्ण?
उसे लम्बे समय तक कैसे बचाएं
ज्यादा महत्वपूर्ण। 



Monday, March 14, 2016

छत्तीसगढ़ का वृन्दावन-छुईखदान

प्रकृति की
गोद में

मैकल की पहाडि़यों के करीब
बसा है, मेरा गाँव।

आओ, आज मैं तुम्हें
अपने गाँव के बारे में कुछ बताऊँ

अपने गाँव की हवा, पानी, मिट्टी का
कुछ कर्ज चुकाऊं।

कई रियासतों में एक सरल रियासत थी
छुईखदान,

राज किया बैरागियों ने
छुईखदान में,

शहीदों की नगरी है
छुईखदान,

भगवान श्रीकृष्ण के
मंदिर की बनावट को देखकर

अक्सर बुजुर्ग
कहा करते हैं

छत्तीसगढ़ का वृन्दावन है
छुईखदान।


Saturday, March 12, 2016

रफ़्तार

इन्सान जिस
रफ़्तार से
आसंमा की ओर
बढ़ रहा है,

उससे कहीं
तेज रफ़्तार से वह,
प्यार, दर्द और अपनापन
भूलता जा रहा है।
माँ का आँचल

माँ
सागर है प्यार का

माँ
दोस्तों की दोस्त है

माँ
दर्द हरने वाली दवा की खान है

माँ
जीवन का सच है

माँ
रौशनी  की राह है

माँ, के आँचल के कोने में
सागर सा प्यार है

माँ के आँचल में,
जन्नत की बहार है

सागर की शांत फिजा भी 
माँ के आँचल को तरसती है
कहीं ज्वार-भाटा उसे
अशांत ना कर दे।


Friday, March 11, 2016

सजा

किसी की
गलती की
सजा इतनी
न दे ऐ ‘नीलम’

कहीं उस बदनसीब
के पास पश्चाताप
के लिए दो वक्त,
भी न हो।

कल

कल के साथ
बात का अर्थ बदलता है

कल का वर्तमान
आज जो अतीत है

कल कुछ और कहता था
आज कुछ और बता रहा है

आज का वर्तमान
जो कल अतीत होगा

कल के वर्तमान को
कुछ और बताएगा।

Thursday, March 10, 2016

जीत

जीत
सिर्फ पा लेना
नहीं है,

यदि हमें
नया रास्ता
दिखे,

और हम
उस पर
चल पड़ते हैं,

तो यह भी
हमारी
जीत है।


साथ

मैं माँ के साथ रहा
27 बरस
माँ मेरे जे़हन में
अब भी
मेरे साथ है
क्या वे कम है?
माँ का साथ
मेरे लिए।

Wednesday, March 9, 2016

भ्रूण हत्या

विधाता ने प्रकृति की हर माता को
मातृत्व गुणों से नवाजा है,

इन्सान ही नहीं
पशु -पक्षी, कीट-पतंगों
हर एक में,
मातृत्व की झलक देखी जा सकती है।

विधाता ने इंसान को विवेक,
पशु-पक्षी
कीट-पतंगों से
कहीं ज्यादा दिया है।

इंसान मातृत्व की जननी
मादा भ्रूण को पहचान कर
नष्ट करने में,
जिस विवेक का
परिचय दे रहा है,
उससे विधाता हैरान भी है
और खुश  भी है।

हैरान इसलिए कि, उसने इंसान को
ईश्वर  की सुन्दर कृति कैसे कहा?
और खुश इसलिए कि उसने
पशु -पक्षी, कीट-पतंगों को
विवेक कम दिया।

अन्यथा दुनिया में, इंसान के साथ
प्रकृति पूरी तरह नष्ट हो जाती,
और समय से पहले प्रलय देखकर
विधाता फिर किसे
दुनिया में पहले
सृजन के लिए भेजता।।


Tuesday, March 8, 2016

कीमत

हर तरफ रौशनी   से
घिरे हैं हम,
रौशनीकी कीमत
क्या बतायें हम।

कभी जाके पूछो उनसे,
जो अंधेरों की दुनिया को
रौशनी की दुनिया समझकर
जीते है।

एक-रोशनी यदि
मिल जाये उन्हें
तो अँधेरे की दुनिया का
रास्ता कहाँ से लायें वो।


Monday, March 7, 2016

एहसास

हर माँ को
उसके बच्चों की निगाहें
निहारती रहती है
कहीं शून्य में,
माँ नज़र आ जाये
और एहसास दिला जाये
हाँ बेटा, मैं तेरे करीब हूँ
तू सो जा।

किन्तु माँ कहती है
मुझे अभी नींद नहीं आयेगी,
क्योंकि तेरे दर्द का एहसास
मेरे सीने में जिन्दा है,
उसके बुझने के बाद
मैं सोऊंगी....
चाहे लाख बरस जागना पड़े।

मै जागते हुए उसके बुझने का
इंतजार करूंगी,
तू मेरी फि़क्र मत कर
मैं जागते हुए,
तेरी नींद के एहसास में
गहरी नींद सो लूंगी...!!!

Sunday, March 6, 2016

वजूद

क्या
वजूद के बिना
जीवन
अधूरा है?

क्या
वजूद ही
सफलता का
मापदंड है?

औरों को
गिराकर
कुछ पा लेना
क्या वजूद है?

क्या औरों के
दर्द, खुशी  के लिए
कुछ खो देना,
वजूद नहीं है

नामी की जिन्दगी हमेशा ,
वजूद नहीं हो सकती।
और ना ही।
गुमनामी की जिन्दगी को
बिना वजूद के कहा जा सकता है।

आखिर...
वजूद को जाने कैसे?
‘मै’ में लिपटा मेरा व्यक्तित्व वजूद नहीं है
‘हम’ को दर्शाता मेरा व्यक्तित्व ही वजूद है।
तभी तो कहा जाता है,
वजूद नहीं, तो जीवन नहीं।

Saturday, March 5, 2016

अपेक्षाएं और खीझ

अपेक्षाएं और खीझ
समानांतर चलती है

ना हम अपेक्षाएं रखे
ना हमें खीझ होगी

खीझ अपेक्षा से,
सौ गुना तेज चलती है

सौ प्रतिषत खाीझ से
मुक्ति चाहतें हैं तो

एक प्रतिषत
अपेक्षा को गति ना दे

आदत

सारा जहाँ
बदल गया

तुम बदल गई
मैं बदल गया

नहीं बदली तो
सिर्फ मेरी आदत

पहले तुमसे
जागते हुए मिलने की
आदत थी,

अब
ख़्वाबों में मिलने की 
आदत है। 




Friday, March 4, 2016

दर्द की अनुभूति

दर्द की अनुभूति

मृत्यु शास्वत  सच है, किन्तु
माँ की मृत्यु
दे जाती है अनुभूति,
दर्द की।

खुद के दर्द के लिये
अपनों का दर्द जानना आवश्यक  है। 

अपनों के दर्द की अनुभूति,
गैरो के दर्द की अनुभूति,
बिना संभव नहीं।

इंसान जुंबा का स्वामी है,
इंसान के दर्द की अनुभूति 
बेजुबान के दर्द की अनुभूति-बिन
संभव नहीं। 


Thursday, March 3, 2016

इंसान और यमराज

इंसान और यमराज

हर-तरफ अन्धेरा है
मौत का साया
हर जिन्दा दिलों को
डस रहा है।

‘मौत’ कोई नयी बात तो नहीं,
पहले भी तो लोग मरते थे
मगर आज ‘मौत’ से
इतना डर क्यूँ?

पहले मौत का रखवाला
एक यमराज होता था।

मगर आज
एक इंसान,
दूसरे इंसान के खून का
प्यासा हो गया है।

तभी तो लगता है,
आज का इंसान यमराज हो गया है।


Wednesday, March 2, 2016

खामोशि 

जब भी
मेरी निगाहें
उनकी निगाहों से
टकराती है।

एक
अजीब सी
हलचल
दिल में होती है।

तभी
हवा का झोंका
कानों में
कुछ कह जाता है

निगाहें-निगाहों की बात
समझ गयी हैं,
मगर उनके होंठ
हमारी तरह ही खामोश  है।


Tuesday, March 1, 2016

स्वतंत्रता दिवस-चिंतन

स्वतंत्रता का महत्व
तभी जान पायेंगे
जब भारत को
प्राचीन मूल्यों के
शि खर पर पहुँचायेगें।

सदियों की गुलामी की दास्तां से
मुक्त कराने वाले वीर शहीदों ने
न सिर्फ हमें आजादी दिलाई
बल्कि भारतीय संस्कारों को बचाने की
सीख भी दी।

स्वतंत्रता
आत्म संयम और अनुशासन की
सीख देती है
कहीं हम देश  के वजूद को
स्वयं की स्वतंत्रता समझकर
खो न दे।