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Tuesday, February 23, 2016

प्रकृति

विधाता का सुन्दर
सृजन है
प्रकृति।

प्रकृति का
उपहार है,
माँ।

माँ ही
प्रकृति है,
प्रकृति ही 
माँ। 

गुलाब एक फूल

गुलाब
एक फूल
यदि इन्सान की तरह
सोचता,
तो शायद
इतना खिला, सुगन्धित
कभी नहीं होता।

फूल भी,
अपने जिस्म में
इन्सान की तरह,
जहर घोलने लगता,
जो निष्चित ही उसे
जड़ से खोखला कर
गिरा देता। 



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