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Tuesday, June 24, 2014

किलो मीटर

         सिक्कीम यात्रा के दौरान हम लोग सिक्कीम की राजधानी गैगटोक जब पहुंचे तब हमारी इच्छा उस खूबसूरत राज्य के दूरस्थ अंचल को देखने को हुई, फिर हम लोगों ने जीरों र्पाइंट जहां पर भारत देश  की सीमा चीन से मिलती है जाने को हुई। गैगटोक से लाचूंग पहुंचते वक्त उबड़-खाबड़ घाटी वाले रास्ते तय करने में हमे घंटो लगे क्योंकि कुछ वर्ष पहले लाचूंग के आस-पास भयंकर भूकम्प आया था। जिसके कारण रोड की हालत खराब हो गई थी। पूरा रास्ता डर और रोमांच भरा था और करीब 15-20 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से हम लोग अपने स्काॅपियों वाहन से लाचूंग पहुंचे। लाचूंग भी बहुत ठंडा स्थान है और वहां की छटा भी निराली है। हम लोग रात लाचूंग रूके और सुबह युमतांग वेली होते हुए जीरो पाईट के लिये रवाना हुए रास्ते में ख़ूबसूरत नजारा देखते ही बनता था। फूलों  की घाटी ऐसा लगता था, मानो  प्रकृति फूल लेकर घुमक्कड़ो का स्वागत कर रही है। युमतांग वेली में बहती हुई नदियां देखते ही बनती थी फिर हम लोग युम्तांग के ऊपर सरफिर्ली और बर्फिले रास्ते में मंजिल की ओर बढ़ रहे थे, हमारी गाड़ी का किलोमीटर भी मंजिल के निकट आने का संकेत दे रहा था। रास्ते में बर्फ बारी होने लगी जिससे हमारा यात्रा और सुहावना और सुखद् हो गया। हम लोग जीरो पाईंट से लगभग 2 किलोमीटर पहले ही पहुंच पाए क्योंकि सारा रास्ता बर्फ की बड़ी-बड़ी चादर ओढ़ चुकी थी और बार्डर में लगी फोर्स हमें आगे जाने की इजाजत नहीं दे रही थी। 
जब हम लौट रहे थे तब यकिंन ही नहीं हो रहा था कि हम जिन रास्तों से गए थे उन रास्तों पर सफेद रूई के समान बर्फ की चादर कई फिट ढ़क गई थी जिसे संबंधित विभाग द्वारा हटाया जा रहा था और हम लोग धीरे-धीरे वापस लौट रहे थे युम्तांग की ऊंचाई लगभग 11620 फिट थी और हम लोग 15000 फिट से अधिक ऊचाई में पहुंच चुके थे। हमारे एक साथी को जब श्वास लेने में तकलिफ होने लगी तब हमें एहसास हुआ कि आखिर हम कितने ऊंचे पहाड़ तक आ पहुंचे जहां भी निगाहें जाती बर्फिले पहाड़ और पाताल को छू लेने वाली घाटियां दिखाई देे रही थी।
फूलों की घाटी और जहां पर स्नोफाल हुआ वह स्थल हमारे यात्रा का मिल का पत्थर साबित हुआ। गाड़ी इतनी धीमी रफ़्तार से जलती थी कि हर पल हमारा ध्यान किलोमीटर में जाता और हम यह जानने की कोशिश करते, क्या हमनें एक किलोमीटर तय किया है........  

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