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Thursday, June 19, 2014

माँ कुदरत नहीं तो और क्या है ?

माँ कुदरत नहीं तो और क्या है ?


माँ कुदरत नहीं, तो और क्या है ?
माँ का आँचल समन्दर नहीं , तो और क्या है ?
माँ की स्वप्निल निगाहें, चाँद नहीं, तो और क्या है ?
माँ का प्यार समन्दर से गहरा नहीं, तो और क्या है ?
माँ का त्याग हमारा सृजन नहीं, तो और क्या है ?
माँ का हमारे हर दर्द का उसके सीने में स्पन्दन, 
हमारे दिल की धड़कन उसके सीने में नहीं, तो और क्या है ?
माँ का हमारे कानों में कुछ कह जाना और हर पल राह दिखाना,
उसका हर पल हमारे साथ होने का एहसास नहीं तो और क्या है ?
माँ कुदरत का खजाना नहीं, तो और क्या है ?
माँ कुदरत नहीं तो और क्या ?


नीलम 13.06.2014

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