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Thursday, June 19, 2014

माँ की पुण्य तिथि पर उनको श्रद्धांजली, दिनांक 19.06.2014

माँ की पुण्य तिथि पर उनको श्रद्धांजली दिनांक 19.06.2014

 माई जी के चरणों में 

माई जी से कुछ मांगने जाते है,
मांग पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाते है,
ये हमारा माई जी के प्रति
आस्था नहीं, व्यापार है,
श्रद्धा नहीं स्वार्थ है
समर्पण नहीं,  हमारा डर है।

हम माई जी को
ये भी बताने जा सकते हैं
आज मैं कब्र के करीब एक कदम जरूर पहुँचा हूँ
किन्तु आज मैं कब्र में खुद को नहीं पाया  हूँ
आज मैं इस एक दिन को इंसान समझकर जीया  हूँ
आज मैंने एक घूंट इंसानियत का पीया  हूँ

माई जी
तेरी ही कृपा है
आज मैं
खुद को इंसान  हूँ, यह एहसास कराया है
कल भी मैं ऐसा ही जिंदा रहूंगा
तूने भी तो मुझे एहसास कराया है।

माई जी के चरणों में
आज मैं जिंदा  हूँ
इसलिए अश्रु-सुमन, श्रद्धा संग
चढ़ाने गया  हूँ ,
माईजी के चरणों में
अश्रु-सुमन,  समर्पण संग चढ़ा आया   हूँ
अपनी पीड़ा मिटा आया  हूँ ।

कह आया  हूँ
पीड़ा मुझे रूलाती नहीं ,
पीड़ा मुझे तड़फाती नहीं ,
पीड़ा मुझे नई राह दिखाती है,
पीड़ा मेरी मेरे पास कम है,
औरों की पीड़ा का मैं समन्दर  हूँ 
मेरा दिल अज़ीब है
पीड़ा पाकर फटता नहीं, फैलते जाता है।

हर पीड़ा मुझे
मेरी माँ को
मेरे साथ, हर पल होने का
एहसास करता है,
जीने के लिए, इस जीवन में
किसी वजह की जरूरत नहीं,
मेरी माँ का मेरे पास
रहने का एहसास काफी है,
जीने के लिये।

नीलम
दिनांक-12.06.2014

1 comment:

Anonymous said...

bahut achha !!