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Monday, March 24, 2014

-ःः समीक्षा:ः-

                                          -ःः समीक्षा:ः-
काव्य संग्रह - बाई का नज़रिया
रचनाकार - श्रद्धेय श्री नीलम चंद सांखला

        शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक अभिरूचियों, न्यायिक सेवा के गुरूतर दायित्व के कुशल निर्वहन के साथ-साथ काव्य को अपनी मनःपूजा मानने वाले कवि हृदय के धनी श्रद्वेय श्री नीलम चंद सांखला द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘‘बाई का नज़रिया‘‘ उनकी विविध रचनाओ से परिपूर्ण है। इन रचनाओं में विविधता के दर्शन होते है। अनुभूति होती है एक ऐसे संवेदनशील कवि की जो इंसानियत के प्रति सजग है, दीन की पीड़ा को महसूस करता है, समाज, संस्कृति एवं सभ्यता के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को भाॅपने की क्षमता रखता है इसलिये वह अपने अन्तर्मन की पीड़ा एवं भावना को कलम के सहारे काव्य का रूप देने का सार्थक प्रयास बड़ी सहजता के साथ करता है, जिसकी परिणति ‘‘बाई का नज़रिया‘‘ के रूप में सामने आती है।
        प्रकृति के अनमोल उपहार के रूप में माॅ की ममता को समर्पित है ‘‘बाई का नज़रिया‘‘। माॅ वास्तव में माॅ ही होती है उसका कोई विकल्प ही नहीं है। प्रकृति के प्रति सहज आकर्षण इनकी रचनाओ में समाहित है। कविता-‘प्रकृति‘ ‘गुलाब के फूल‘ प्रकृति की अदभूत निगाहें इसका ज्वलंत उदाहरण है। ‘‘एक बदनसीब इंसान‘‘ में नकली दवा माफिया के प्रति करारा व्यंग्य है, यह रचना सीधे हृदय को स्पर्श करती है। आज का इंसान में इंसानियत के प्रति चिंतन निकल पड़ा है। राष्ट्रप्रेम को समाहित करती रचना ‘‘स्वतंत्रता दिवस-चिंतन‘‘ स्वतंत्रता के महत्व पर ध्यान आकर्षित कराती है। कन्या संतति के संरक्षण को महत्व देती रचना ‘‘भू्रण हत्या‘‘ करारा तमाचा है उनके लिये जो कन्या भू्रण को गर्भ में ही खत्म करवा देते है।
        श्री सांखला जी जन्मभूमि की महत्ता को अच्छी तरह से समझते है। अपनी जन्मभूमि ‘छूईखदान‘ को समर्पित उनकी रचना मर्मस्पर्शी है। पर्यावरण संतुलन के प्रति उनका कवि हृदय मचल उठा है- ‘शेरनी‘ नामक रचना में। छत्तसीगढ़ के वनोपज के प्रति उनका प्रेम एवं महत्व ‘‘प्रकृति की अदभूत निगाहें‘‘ नामक रचना में दृष्टव्य है तेंदू के गुण एवं महत्व पर बरबस ध्यान आकृष्ट होता है। ‘‘हौसला‘‘ शीर्षक में संदेश है सदैव आशा एवं विश्वास के साथ कदम बढ़ाने का। एक पिता का बेटी के प्रति असीम स्नेह का प्रतीक है- ‘‘एक बेटी तो होनी चाहिये‘‘। रचना ‘‘माॅ का प्रतीक‘‘ आज के संदर्भ में जीवन संदेश देती है कि सच्चा भाई माॅ का स्वरूप ही होता है। वह कलयुग में राम-भरत का प्रेम दर्शन उपस्थित करता है।
        प्रसाद एवं माधुर्य गुणों का समन्वय दृष्टव्य है। लक्षणा एवं अभिधा शब्द-शक्ति तथा व्यंग्यात्मक शैली काव्य का आकर्षण है। काव्य संग्रह ‘‘बाई का नज़रिया‘‘ में अन्त क्षणिकायें अपने शीर्षक को सार्थक करती प्रतीत होती है। शब्द-विन्यासों का सफल समन्वय रचनाओ में है।
        मैं कतई एक स्थापित समीक्षक नहीं हूं फिर भी मैंने एक छोटा सा प्रयास किया है, समीक्षात्मक दृष्टि डालने का।
        श्री सांखला जी के प्रति भक्तिवर्धक भविष्य की अंनत मंगलकामनाओं के साथ कोटिशः साधुवाद ज्ञापित करता हूं।

दिनांकः- 28.12.2013   
     (डाॅ. प्रवीण गुप्ता)
                अ. व्याख्याता
        शास. नेमीचंद जैन महाविद्यालय
                     दल्लीराजहरा   
                    जिला- बालोद
               निवासी-आमापारा बालोद
           मो.9406207171, 8889136057

Sunday, March 16, 2014

मोड़

      मोड़

आज आँसू झरे हैं , नयन  से
इसलिये नहीं कि ,
आज मैं रोया हूँ।
इसलिये नहीं कि ,
आज अरमान टूटे हैं , मेरे।

'माँ और भाई ' ने
एक ख्वाब संजोये थे ,मेरे  नयन में अपनों का।
आज ख्वाब को टूटते देख
मन मेरा रोया है।

'माँ और भाई' को
टूटे ख्वाब कैसे दिखाऊँगा
ये सोंच आत्मा रोई है।

ख्वाब को सजोने ,
आपना सर्वस्व लुटा आया हूँ ,
इसी ख़ुशी में
नीर नयन से भर आई है।

लोभी ने जीवन को ,
नया   मोड़ दिया।
माँ  ने निगाहों
का नज़रिया
मेरे निगाहों को
आख़िर , दे ही दिया ,
माँ तुझे प्रणाम।

१५। ०३। २०१४

                     


Sunday, March 2, 2014

स्वार्थी

स्वार्थी

रिश्तेदार सामने दोनों हाथों में माला लिये
स्वागत् में खड़े नजर आते है
मुड़कर देखने पर, माले में रखे खंज़र से
वार करते नज़र आते है।

इन आस्तिन के सांपो को
जिस्म का खून कब-तक पिलाएंगे?
क्या बर्बाद होते तक
उन्हें जिस्म से लगाऐंगे।

बेहतर है उस आस्तिन को ही काट दो
एक हाथ से सूरज की नई किरण को सलाम दो
एक कदम नई मंजिल पर रखकर नया पैगाम दो
दूजे कदम पर माँ खूद आयेगी, और दूजा हाथ भी साथ लायेगी।


(बाई का नज़रिया मेरी काव्य संग्रह 28.12.2013 को प्रकाशित हुई घर में मैं बाई को माँ कहता था आज बाई का नज़रिया सार्थक हुआ। आज मैंने अपनों को अपनी निगाहों से नहीं बल्कि बाई की निगाहों से देखा तब उन्हें पहचाना।)