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Wednesday, January 22, 2014

काव्य संग्रह बाई का नजरिया का विमोचन

कविता के केन्‍द्र में इन्सान होना चाहिए
हिन्दी मारीशस की अस्मिता है: हीरामन


रायपुर 28 दिसम्बर, हिन्दी मारिशस की अस्मिता है। मारीशस ने महिला आरक्षण लागू कर मातृशक्ति का सम्मान दिया है। कविता संवेदना का संसार रचती है। कवि नीलम चंद सांखला ने मातृशक्ति को केन्‍द्र में रखकर अनुभूति का संसार रचा है। उक्त विचार काव्य संग्रह बाई का नजरिया का विमोचन करते हुए मारिशस के कथाकार पत्रकार राज हीरामन ने व्यक्त किया। अध्यक्षता छत्तीसगढ़ मित्र के संपादक डॉ. सुशील त्रिवेदी नें की।

समारोह का प्रारंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मॉं सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण से हुआ। अतिथियों का स्वागत मोतीमाला एवं तिलक चंदन से हुआ। छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष गिरीश पंकज नें स्वागत भाषण देते हुए कहा कि नीलम चंद सांखला के कवि रूप में हम आज परिचित हो रहे है। मुख्य अतिथि श्री राज हीरामन एवं अध्यक्ष डॉ.सुशील त्रिवेदी सहित मंचस्थ अतिथियों नें श्री सांखला की पुस्तक बाई का नजरिया का विमोचन किया विशिष्ठ अतिथि श्री रमेश नैयर नें कहा कि पुस्तक एवं साहित्यिक सृजन से समाज सुसंस्कृति होता है। श्री सांखला नें इस संस्कृति में महती योगदान किया है वे स्वयं न्यायाधीश है वे समाज के साथ न्याल करेंगे उन्होंने मॉं को समर्पित कवितायें दिल खोलकर लिखी है मॉं का दिल बच्चों के लिए धड़कता है, ईश्वर की जन्मदात्री है मॉं, बच्चियों के लिये लिखी गई कविताये भी कोमल दुनिया से परिचित कराती है।

गायक अभिजीत के साथ कवि नीलम चंद सांखला
कार्यक्रम में कवि नीलमचंद सांखला नें अपने इस संग्रह की रचना प्रक्रिया से अवगत कराया, उन्होंने कहा कि मॉं संसार के सभी दुखों से अनुभूत है, उन्हीं के प्रेरणा से कविता के शब्द प्रस्फुटित हुए हैं। मॉं नें मुझे जीवन जीने का नजरिया दिया। राजा और रंक का फर्क बताया। उन्‍होंनें आगे कहा कि आज बेटियों के अस्तित्व को बचाया जाना आवश्‍यक है। उन्होंने चुनिंदा कविताओं का पाठ किया। डॉ.प्रवीण गुप्ता के समीक्षा पत्र का पाठन ब्लागर संजीव तिवारी नें किया।

समीक्षक श्री अशोक सिंघई नें कहा कि बिखरती हुई दुनिया को कवि नें मॉं की ममता के साथ देखा परखा है। कवि नें ध्वनि के अनुशासन को शब्दों के माध्यम से बांधा है कवि ने भ्रूण-हत्या का दर्द को गहराई के साथ उकेरा है। तेन्दू पर कवि ने सूक्ष्म दृष्टि डाली है। उन्‍होंनें कहा कि कवि की कवितायें बोध-कथाओं की तरह तरल है। समीक्षक डॉ. अजय पाठक ने कहा कि कवित को पूरी तरह से परिभाषित नहीं किया जा सकता। कवि नीलमचंद सांखला ने जीवन-संघर्ष के साक्षात्कार को शब्द-रूप दिया है। उनके काव्य में गहरा आध्यात्मिक दर्शन भी है। उनकी कविता में छत्तीसगढ़ का गांव भी वृंदावन की तरह है। सांखला परिवार के वरिष्ठ सदस्‍य श्री भंवरलाल सांखला ने कहा कि श्री हीरामन जैसे हिन्‍दी के प्रेमियों नें हिन्दी को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाया है। इस अवसर पर उन्‍होंनें सरस्वती के संपादक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का भी स्मरण किया।

मुख्य अतिथि मारीशस के कथाकार संपादक राज हीरामन ने कहा कि मारीशस के लिए हिन्दी मॉं है। भारतवंशियों के लिए हिन्‍दी उनकी अस्मिता है। मैं भारत अपनी मॉं को देखने आया हूं। उन्‍हानें आगे कहा कि न्यायाधीश संवेदनशील होता है, श्री सांखला एक संवेदनशील कवि है उनकी कविता के केन्‍द्र में इंसान है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज और हमारी सरकार मातृशक्ति का सम्मान नहीं करेगी, तब तक संस्कार पर खतरे रहेंगे। इस कविता में मॉं के प्रेम और स्नेह का संसार है। भारत के बेटों ने मारीशस को यूरोप के मुकाबले में खड़ा किया है।

समारोह के अध्यक्ष डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि हिन्‍दी और गॉंधी मारीशस में जिंदा है। भारत में गांधी को तलाशना कठिन कार्य है। श्री राज हीरामन हिन्दी की ज्योति लेकर गांधी को तलाशने आए है। आज हमने बख्शी जी को रचनात्मक श्रद्धांजली दी है। कवि नीलमचंद सांखला एक स्वतंत्र कवि है। कवि की स्वायत्ता उसे लोकमंगल का अधिकारी बनाती है। कवि की अपनी अलग सत्ता होती है। कविता में भावजगत की सत्ता होती है। श्री सांखला की कवितायें नया अर्थ देती हैं मॉं प्रकृति पर्याय हैं सबसे ज्यादा हमला प्रकृति पर हो रहा है। इसी तरह आधुनिकता के नाम पर मॉं की सत्ता पर हमला हो रहा है। कार्यक्रम का सुंदर संचालन कु. पूर्वी सांखला ने तथा आभार प्रकट समिति के संचालक डॉ.सुधीर शर्मा ने किया अंत में स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। समारोह में प्रो.के.रहमान, डॉ.आलोक शुक्ल, डॉ.श्याम सुंदर त्रिपाठी, राहुल सिंह, भंवर शुक्ल, जयप्रकाश मानस, रवि श्रीवास्तव, मुमताज, श्री भार्गव, मोहन चोपड़ा, डॉ. जे.आर.सोनी, अशोक शर्मा, ब्लॉगर संजीव तिवारी, विनोद शुक्ल, शंकरलाल श्रीवास्तव, इंदरचंद घाडीवाल, त्रयम्बक शर्मा, पद्मश्री भारती बंधु एवं सांखला परिवार के सदस्य उपस्थित थे। समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ।






4 comments:

SUMIT said...

BAI KA NAJARIYA IS BOOK DEDICATED TO MOTHER. EVERYBODY WHO LOVE HIS MOTHER LIKE IT. COLLECTION OF POEMS GIVE SOME GUIDELINE TO LIFE ALSO I.E CHALNA HI JEEVAN HAI PROVIDES THE WAY TO ACHIEVE UR GOAL IN LIFE,
SUVAM KA AKLAN PROVIDES HOW TO SATISFIED IN LIFE,
PAISA PROVIDES IMPORTANCE OF MONEY,
AND MOST ONE I LIKE IS MAA MAA HOTI
HAI EK BETA SAPUT YA KAPUT HO SAKTA HAI PAR BETE KE LIYE MAA MAA HOTI HAI.

Anonymous said...

nice

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

वह माँ के आँचल की छाया
जिसमें छिपके सो जाता था
वही पुराना टूटा छप्पर
जहाँ सपनों में खो जाता था
मधूर सुरीली माँ की लोरी
तड़पाएगी तुझे जरुर कहीँ
लौट के आजा घर दूर नहीं

मेरे गीत का एक अंश समर्पित है माता जी को………… शुभकामनाएँ

Poonam Chand Yadav said...

बाई की नजरिया कविता को पढ़ने से हमको जीवन में मातृत्व का भाव को अपने अंदर जगाने की प्रेरणा मिलती है साथ ही आपकी कविता बाई की नजरिया से हमने आपको पढ़ लिया है।