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Sunday, July 29, 2012

chand lamhein

पूरी ज़िन्दगी
तेरे साथ बिताऊं
ऐसी मेरी किस्मत कहाँ

तेरे बिना
ज़िन्दगी गुज़ारूँ
ऐसी मेरी हिम्मत कहाँ

तेरे बिना भी
तेरे साथ
जीना सिख लिया 

यकीन न हो तो
आके देख ले पल भर
तेरे ख्यालों  के आगे
बौना बनाया है जीवन को .

1 comment:

वरुण कुमार सखाजी said...

सांखला जी।
आपका पत्र मिला, किंतु उसमें आपसे संपर्क करने का कोई नंबर नहीं रहा। इसी बहाने अच्छा है आपके ब्लॉग पर आना हो गया। अच्छी अभिव्यक्ति इन पंक्तियों के जरिए। सबसे अच्छी पंक्ति है, तेरे बिना जिंदगी गुजारूं ऐसी मेरी किस्मत कहां। दोस्ती से जुड़ी आपकी राय हम अपने अखबार में ले रहे हैं, अगर समय रहते संपर्क हो जाए तो हम यह भी जानना चाहेंगे कि आपके जीवन में दोस्त का क्या स्थान है और वह कौन से पल हैं जो आपको भावुक कर देते हैं। कृपया आवश्यक रूप से बताएं:
सधन्यवाद
वरुण के सखाजी, हेड, सिटी भास्कर (दैनिक भास्कर) रायपुर.9009986179
sakhajee.blogspot.in