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Thursday, November 3, 2011

दर्द की अनुभूति

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

लंबे समय से निजी कारणो से ब्लाग में नहीं आ सका था ।
दिनांक 30/10/2011 को भिलाई में ब्लाग लिखने वालों का सम्मेलन था , उक्त सम्मेलन में मैं सम्मिलित होने शाम को जा रहा था तब माँ के बारे में कुछ विचार आने लगे और अंततः उक्त विचार एक लेखनी को जन्म दे गई:-

दर्द की अनुभूति
मृत्यु शास्वत सच है , किन्तु
माँ की मृत्यु
दे जाती है अनुभूति ,
दर्द की ।
खुद के दर्द के लिये
अपनों का दर्द जानना आवश्यक है ।
अपनों के दर्द की अनुभूति ,
गैरो के दर्द की अनुभूति ,
बिना संभव नहीं ।
इंसान जुंबा का स्वामी है ,
इंसान के दर्द की अनुभूति
बेजुबान के दर्द की अनुभूति-बिना
संभव नहीं ।।

2 comments:

Vaibhav Pandey said...

सर बहूत ही अच्छी कविता हैं ...दर्द की यह अनुभूति हमेशा बरकरार रहें।

anand said...

its marvellous..!!