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Saturday, September 3, 2011

क्षमा

खामेमि सव्वे जीवा
सव्वे जीवा खमंतुमें ।
‘‘ क्षमा पर्व ‘‘
‘ क्षमा वीरस्य भूषण ‘
क्षमा मांगने वाले और क्षमा देने वाला दोनों ही साधूवाद के पात्र हैं। जब तक व्यक्ति विवेकवान नहीं होगा उसका अहंम उसे क्षमा मांगने से रोकेगा इसी प्रकार जब तक व्यक्ति सहनशील नहीं होगा वह क्षमा प्रदान नहीं करेगा ।
क्षमा ‘ कसाय ‘ को शांत करने की औषधी है । क्षमा क्रोध की ज्वाला को शांत करता है। अग्नि की ज्वाला तो दूसरों को जलाती है किंतु क्रोध की ज्वाला पहले हमें जलाती है उसके बाद औरों को ।
पर्यूषण के इस महापर्व पर मैं आप सभी से ज्ञात/अज्ञात रूप में आपको मन वचन और काया से जो ठेंस पहुंचायी हो उसके लिये तहे दिल से क्षमा प्रार्थी हॅू और आशा करता हूँ कि आप मेरे उक्त कृत्य के लिये मुझे क्षमा प्रदान करगें क्योकि आपका दिल विशाल है तभी तो मैं यह कह सकता हूँ
कि
असंभव है
गल्तियां ना करना
किन्तु
संभव है
क्षमा ।

1 comment:

rajni said...

pyari prastuti..