have faith in me and in my blog ....and.... i m sure u'll then start appreciating nature and small small things around yourself!!! so, FEEL FREE TO SUBSCRIBE & ENJOY!!!

Friday, July 15, 2011

maa ke saman

मॉं के समान

दुनिया में हुबहू दो चेहरे एक जैसे हो ऐसा प्रसंग बहुत कम मिलता है , और मैं मन की बात कहूं , तो नहीं मिलता है । जुड़वां बच्चों की सूरत एक जैसी दिखती हैं किन्तु घ्यान पूर्वक देखने पर उनके चेहरों को भी एक दूसरे से भिन्न बताया जा सकता है जैसे थोडी नाक की बनावट में भिन्नता हो या हो सकता है बोलने का तरीका भिन्न हो । फिर भी जिनकी सूरत दूसरे व्यक्ति की सूरत से मिलती है तब एक व्यक्ति को देखने पर हमें दूसरे व्यक्ति की सूरत या नाम याद आ जाता है ।




किन्तु ऐसा प्रसंग बहुत कम मिलता है जब दो व्यक्तियों की सूरत एक दूसरे से नहीं मिलती हो तब भी एक व्यक्ति से रूबरू होने पर दूसरे व्यक्ति की याद अनायास जहन में उभरती हो ।
मेरी अपनी मान्यता है , यदि हम सिर्फ ऑखों से देखते है , तो दो भिन्न सूरत वाले व्यक्ति में समानता नजर नहीं आयेगी अर्थात एक व्यक्ति की सूरत दूसरे को याद नहीं दिलायेगी किन्तु जब हम मन की ऑखो से भी देखते है तब एक व्यक्ति के सारे व्यक्तित्व की कुछ झलक जब दूसरे व्यक्ति की सूरत में थोडी भी नजर आ जाती है तब दूसरा व्यक्ति सहज ही याद आ जाता है ।


मैं जब भी सामने वाली काकीजी से मिलता था तो यूं लगता था उनके पास ही रहूं क्योंकि उनके समीप रहने पर मुझे जो खुशी मिलती थी उसे मैं शब्दों में बयां नही कर सकता । मन के उद्गार को कुछ यूं बयां कर रहा हॅू -



जिस नारी
की
सूरत
जन्म देने वाली
मां

की याद दिलाए
वह नारी भी
मॉ

के समान है ।।

5 comments:

Mrs. Asha Joglekar said...

सही कहा । मन की आंखें चाहिये ऐसी समानता देखने के लिये । आप भाग्यशाली हैं कि माँ से दूर होकर भी माँ के पास हैं ।

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर विचार हैं आपके,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

darshan sankhala said...

maa...
maa kya hoti hain....
ye ussey pooch jiski maa nahi hoti....."

संजीव said...

प्रणाम.

neelam chand sankhla said...

darsan sankhla ne kaha maa ka dard vahee bata sakta hai jiskee maa na ho. maa ek ahsas hai dard janne ke liye maa ka hona awasyak naheen .maa ke hone par maa ko naa jannapana kya hamare ahsas kee kami naheen ?