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Sunday, July 24, 2011

पैसा - एक नजरिया यह भी

हमने अक्सर सुना है , कि कुछ लोगो के लिये पैसा सब कुछ है , कुछ लोगों की मान्यता यह है कि पैसा सब कुछ नहीं किन्तु महत्वपूर्ण है । जहॉं तक मेरी विचारधारा है , न तो मैं पूरी तरह इस बात से सहमत हॅू कि जीवन में पैसा ही सब कुछ है या पैसा का स्थान जीवन में सबसे ऊपर रहा है । किंतु सांसारिक जीवन में पैसे के महत्व से इंकार भी नहीं किया जा सकता । जीने के लिये पैसा आवश्यक है । यह आवश्यकता उसी प्रकार से है जिस प्रकार से जीवन के लिये भोजन का महत्व होता है । भोजन कितना अच्छा है , यह ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि जो भोजन हम ग्रहण कर रहे है , वह किस आय के साधन से पकाया गया है , यह महत्वपूर्ण है , क्योकि अनैतिक साधनो से अर्जित धन से यदि अच्छा भोजन ग्रहण किया जाये तो भी यह शरीर के लिये बलकारी होते हुऐ भी मन को शांति देने वाला या चित्त को स्थिर करने वाला नहीं हो सकता , क्योकि चित्त की स्वाभाविक प्रकृति अनैतिकता से जुडे कार्य को मन में स्वाभाविक रूप से स्थान देने का नहीं हो सकता ।

जीवन में यह कतई आवश्यक नहीं है कि हम अनैतिक साधनों से ही धन बटोरें , हम अपने कार्य को करते हुऐ जो नैतिक साधनों से धन इकटठा करते है , यदि उसका उपभोग और विनियोग विवेकपूर्ण तरीके से किया जाये तब पैसे से पैसा बनाया जा सकता है । ऐसा हो सकता है कि हमारे पास अटूट (अपार) धन न हो किन्तु हम यदि स्वयं की तुलना दूसरो से न कर खुद से करे तो पायेगे कि हमारे पास न सिर्फ पर्याप्त धन है , बल्कि धन के साथ संतोष और शांति भी है , जो अनैतिक रूप से कमाये व्यक्ति के अटूट धन से कही ज्यादा महत्वपूर्ण हमारा धन होगा ।

कई बार मेरे मन में विचार आता है कि विवेकपूर्ण धन का विनियोग कैसे हो। आखिर विेवेक से धन का उपयोग और विनियोग कैसे किया जाये , इस संबंध में मैने


ईश्वर , गुरू , मॉं के अलावा अपने भाई स्वर्गीय श्री भीखम भैय्या से जो कुछ सीखा है उसे शब्दो में व्यक्त करने में कई सौ शब्दों का उपयोग करना होगा और फिर भी मन की बात नहीं बता पाउंगा , इसलिये इसे अपने चंद पक्ति के माध्यम से व्यक्त कर रहा हॅू -

पैसा जोड़ने से जुड़ता नहीं
पैसा खर्च करने से कम होता नहीं
जहां जायज हो वहां सौ रूपये खर्च कम है
जहां जायज नहीं हो वहां एक रूपये का खर्च व्यर्थ है
मनी मेक्स मनी ,
नो रिस्क नो गेन
नो एकाउण्ट नो प्रोग्रेस
नो प्लान नो फियुचर

Friday, July 22, 2011

मुकेश

मुकेश कोई शब्द नहीं
अनुभूति है , दर्द की
वो गीत ही क्या
जिसमे कशिश नहीं
वो आवाज़ ही क्या
जो मुकेश की नहीं ।

------मुकेश मेरा प्रिय गायक है । मुकेश की आवाज़ से मुझे आत्मीय खुशी मिलती है। मुकेश के गाने के बोल जीवन दर्शन के साथ प्रकृति की सुन्दरता को भी बयां करती है ----
१। सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी सच है दुनिया वालों हम है अनाड़ी
२ हम उस देश के वासी है जिस देश में गंगा बहती है
३ ये कौन चित्र कार है
४ भूली हुई यादों मुझे इतना ना सतायो अब चैन से रहने दो मेरे पास ना आओ

Friday, July 15, 2011

maa ke saman

मॉं के समान

दुनिया में हुबहू दो चेहरे एक जैसे हो ऐसा प्रसंग बहुत कम मिलता है , और मैं मन की बात कहूं , तो नहीं मिलता है । जुड़वां बच्चों की सूरत एक जैसी दिखती हैं किन्तु घ्यान पूर्वक देखने पर उनके चेहरों को भी एक दूसरे से भिन्न बताया जा सकता है जैसे थोडी नाक की बनावट में भिन्नता हो या हो सकता है बोलने का तरीका भिन्न हो । फिर भी जिनकी सूरत दूसरे व्यक्ति की सूरत से मिलती है तब एक व्यक्ति को देखने पर हमें दूसरे व्यक्ति की सूरत या नाम याद आ जाता है ।




किन्तु ऐसा प्रसंग बहुत कम मिलता है जब दो व्यक्तियों की सूरत एक दूसरे से नहीं मिलती हो तब भी एक व्यक्ति से रूबरू होने पर दूसरे व्यक्ति की याद अनायास जहन में उभरती हो ।
मेरी अपनी मान्यता है , यदि हम सिर्फ ऑखों से देखते है , तो दो भिन्न सूरत वाले व्यक्ति में समानता नजर नहीं आयेगी अर्थात एक व्यक्ति की सूरत दूसरे को याद नहीं दिलायेगी किन्तु जब हम मन की ऑखो से भी देखते है तब एक व्यक्ति के सारे व्यक्तित्व की कुछ झलक जब दूसरे व्यक्ति की सूरत में थोडी भी नजर आ जाती है तब दूसरा व्यक्ति सहज ही याद आ जाता है ।


मैं जब भी सामने वाली काकीजी से मिलता था तो यूं लगता था उनके पास ही रहूं क्योंकि उनके समीप रहने पर मुझे जो खुशी मिलती थी उसे मैं शब्दों में बयां नही कर सकता । मन के उद्गार को कुछ यूं बयां कर रहा हॅू -



जिस नारी
की
सूरत
जन्म देने वाली
मां

की याद दिलाए
वह नारी भी
मॉ

के समान है ।।