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Sunday, February 13, 2011

माँ माने त्याग और प्यार









सर पर गागर रखकर




कुंए से पानी लाने वाली




लालटेन की रौशनी से




बिजली की रौशनी को




धता दिखाने वाली




बच्चों की परवरिश में




अपने सुखों का




न्योझावर करने वाली




अपने कोख से




साध्वी को जनने वाली




माँ तुझे त्याग की




मूरत कहूँ




या




प्यार लूटाने वाली




सागर ।





( छोटी काकीजी माने स्वर्गी श्रीमती रेशमी बाई सांखला से जुडी कुछ बातें आओ आज तुम्हे बताऊँ ---संचेती खानदान ,कोरना , राजस्थान से सांखला खानदान में आई थी । पति स्वर्गी श्री गेंद मल जी , पुत्र - उत्तम , सुरेश ,जेठमल ,---पुत्री -बिमला ( जो अब विनय श्री के रूप में आचार्य नानेश -रामेश, के सानिध्य में जैन धर्म की सेवा में लगकर सांखला खानदान का नाम रोशन किया है ), शकुन ( जो अब दुनिया में नहीं है ), श्रीमती सुनीता ( जिनके एक पुत्र और एक पुत्री ने अपने जीवन को जिनशासन को सोंपा है ), श्रीमती सुषमा । पौत्र --गोलू , नीलू , रोशन ।







छोटी काकीजी ने १०.२.२००६ , शुक्रवार को छुईखदान में अंतिम साँस ली .