तू खूबसूरत
तेरी हर अदाएं खूबसूरत
तेरी चाल खूबसूरत
तेरी आँखें खूबसूरत ।
ऐ खूबसूरत -
जरा देख ईधर
मैं बदसूरत -
तेरे दिल की तरह ,
मेरा दिल खूबसूरत तेरी तरह ।
मेरा दिल तूने जलाया है
बदसूरत इसे बनाया है
दोनों का दिल बदसूरत ,
अब दूरी क्यूँ खूबसूरत ।
its about nature basically,but have other related poetries ...i m sure when u'll read it u'll find ur innerself more open and closer to urself.....u'll then start appreciating the small things around u!!!have faith!!! a little description of prakriti by me goes as विधाता का सुन्दर सृजन है - प्रकृति। प्रकृति की उपहार है - माँ॥ माँ ही प्रकृति है , प्रकृति ही माँ ॥ -नीलम चंद सांखला
Saturday, July 31, 2010
Tuesday, July 27, 2010
Sunday, July 25, 2010
चौराहा
Friday, July 23, 2010
माँ माने-----
जब
सारे
दोस्त ,
और
अपने ---
मुह मोड़ ले ----
तब
माँ --माने
दोस्ती का अहसास ।
सारे
दोस्त ,
और
अपने ---
मुह मोड़ ले ----
तब
माँ --माने
दोस्ती का अहसास ।
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Thursday, July 22, 2010
याद
-----------------------
आज
याद
क्या आई
उनकी ,
कब्र -
से उठ कर
आंसू
बहाने लगे ।
-----------नीलम---
आज
याद
क्या आई
उनकी ,
कब्र -
से उठ कर
आंसू
बहाने लगे ।
-----------नीलम---
Tuesday, July 20, 2010
सजा
किसी की गल्ती की
इतनी सजा ,
ना दे --' नीलम '
कहीं उस बदनशीब
के पास पश्चाताप ,
के लिए -
दो वक्त ,
भी ना हो ।
इतनी सजा ,
ना दे --' नीलम '
कहीं उस बदनशीब
के पास पश्चाताप ,
के लिए -
दो वक्त ,
भी ना हो ।
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Sunday, July 18, 2010
रफ़्तार
इन्सान जिस तेज रफ़्तार से
आसंमा की ओर
बढ़ रहा है ,
उससे कहीं -
तेज रफ़्तार से वह ,
प्यार , दर्द और अपनापन
भूलता जा रहा है ।
आसंमा की ओर
बढ़ रहा है ,
उससे कहीं -
तेज रफ़्तार से वह ,
प्यार , दर्द और अपनापन
भूलता जा रहा है ।
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Sunday, July 11, 2010
खुशियाँ
हम
खुशियाँ पाने
दर - दर
भटकते हैं ,
प्रकृति
की गोद में
जाकर बैठो
और
देखो
कितनी
खुशियाँ
संजोये
बैठी है
हमारे लिए ।
चित्र गूगल से साभार ।
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Saturday, July 10, 2010
मुकेश माथुर - श्रधांजलि
मुकेशकोई शब्द नहीं
अनुभूति है दर्द की ,
वो गीत ही क्या ,
जिसमे कशिश नहीं ,
वो आवाज ही क्या
जो मुकेश की नहीं ।
मुकेश मेरा प्रिय गायक है । मुझे मुकेश के गीत बचपन से प्रिय है , क्योकि उनके गीत सिर्फ गीत नहीं बल्कि गीत मुझे प्रकृति से है जोड़ा है और जीने की कला भी दी हैहरी - भरी वसुंधरा ,है नीला -नीला ये गगन , ये किस कवि की कल्पना , ये किस कवि की कल्पना ये कौन चित्रकार है ....
प्रकृति का इतना सुंदर चित्रण मुकेश की आवाज का जादू नहीं ,तो और क्या है । मेरे गाँव छुईखदान में Dauram महोबियाजी का एक टूरिंग टाकीज था , उस टाकीज मेफिल्म चालू होने के ठीक पहले आरती का गीत बजता था और उसके ठीक पहले मुकेश का एक गीत बजता था , मेरे घर के छत से अक्सर में वो गीत सुनता था ----चल -अकेला , चल -अकेला -तेरा मेला छूटा राही , तू चल अकेला -------मुकेश ने उस गीत को इस अंदाज मे गया है , जिससे जीवन दर्शन का सहज रूप मे अहसाश हो जाता है । इस लिए मैं कहता हूँ , मुकेश के गाये गीत मेरे लिए जीवन दर्शन की एक राह है ।
प्रकृति का इतना सुंदर चित्रण मुकेश की आवाज का जादू नहीं ,तो और क्या है । मेरे गाँव छुईखदान में Dauram महोबियाजी का एक टूरिंग टाकीज था , उस टाकीज मेफिल्म चालू होने के ठीक पहले आरती का गीत बजता था और उसके ठीक पहले मुकेश का एक गीत बजता था , मेरे घर के छत से अक्सर में वो गीत सुनता था ----चल -अकेला , चल -अकेला -तेरा मेला छूटा राही , तू चल अकेला -------मुकेश ने उस गीत को इस अंदाज मे गया है , जिससे जीवन दर्शन का सहज रूप मे अहसाश हो जाता है । इस लिए मैं कहता हूँ , मुकेश के गाये गीत मेरे लिए जीवन दर्शन की एक राह है ।
Thursday, July 1, 2010
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