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Friday, December 24, 2010

माँ का आँचल

माँ
सागर है प्यार का
माँ
दोस्तों की दोस्त है
माँ
दर्द हरने वाली दवा की खान है
माँ
जीवन का सच है
माँ
रौशनी की राह है
माँ , के आँचल के कोने में
सागर सा प्यार है
माँ के आँचल में ,
ज़न्नत का प्यार है
सागर की शांत फिंजा भी
माँ के आँचल को तरसता है
कहीं ज्वार -भाटा उसे
अशांत ना कर दे ।

5 comments:

nilesh mathur said...

बहुत सुन्दर, माँ के बारे में तो जितना लिखा जाए कम है!

ali said...

संभवतः उसकी तारीफ के लायक शब्द ही नहीं मिलते !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय नीलम चंद सांखला जी
नमस्कार !

सचमुच, मां की तारीफ़ के लिए शब्द मिलना बहुत मुश्किल है … मैं अली भाई से सहमत हूं ।
आपने अच्छे भाव व्यक्त किए हैं अपनी रचना में !

मेरे गीत की कुछ पंक्तियां आपके लिए -
तू सर्दी - गर्मी , भूख - प्यास सह' हमें बड़ा करती है मां !
तेरी देह त्याग तप ममता स्नेह की मर्म कथा कहती है मां !
ॠषि मुनि गण क्या , देव दनुज सब करते हैं तेरा यशगान !
धन्य तुम्हारा जीवन है मां ! स्वत्व मेरा तुम पर बलिदान !!


~*~नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~


शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार

muskan said...

Bahut Khubsurat.

Rahul Singh said...

सदा कम पड़ जाते हैं शब्‍द.