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Friday, December 31, 2010

नया वर्ष मंगलमय हो

नए और पुराने
ख्वाब की
परिणिती की डगर है ,
नूतन वर्ष २०११।
मंगलमय हो ,
नूतन वर्ष

नये वर्ष २०११ की हार्दिक शुभकामनायें

नयी वर्ष २०११ -एक उम्मीद
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किस कदर गुज़री जिन्दगी
हमें याद नहीं
हमें ना गम , ना शिकवा बीते ज़िन्दगी की
माना लाख गल्तियाँ की हमने,
सौ ज़ख्म खाए हमने
फिर भी , कोसों दूर रहा मंजिल हमसे
आज इसी उम्मीद में
अपने आप को नये वर्ष में ले जा रहा हूँ ,
माँ की निगाहों से , नये वर्ष की नयी सुबह की, नई किरण को देखूंगा
और हर एक -पल , नई आशा के साथ बिताऊंगा
और कुछ कर दिखाऊंगा
मंजिल तक ज़रूर पहुँच जाऊंगा ,
मंजिल तक ज़रूर पहुँच जाऊंगा

Friday, December 24, 2010

माँ का आँचल

माँ
सागर है प्यार का
माँ
दोस्तों की दोस्त है
माँ
दर्द हरने वाली दवा की खान है
माँ
जीवन का सच है
माँ
रौशनी की राह है
माँ , के आँचल के कोने में
सागर सा प्यार है
माँ के आँचल में ,
ज़न्नत का प्यार है
सागर की शांत फिंजा भी
माँ के आँचल को तरसता है
कहीं ज्वार -भाटा उसे
अशांत ना कर दे ।

Wednesday, December 15, 2010

सम्बन्ध

इंसान ने जितना सम्बन्ध

भौतिकता से जोड़ा है ,

उससे कहीं ज्यादा

अपनों से तोडा है ।



सम्बन्ध


सत्य का वास्तविकता से

उतना ही गहरा सम्बन्ध है ,

जितना गहरा सम्बन्ध

जीवन का मृत्यु से ।

Thursday, December 9, 2010

इंसान और यमराज

हर -तरफ अन्धेरा है

मौत का साया

हर जिन्दा दिलों को डस रही है

'मौत ' कोई नयी बात तो नहीं ,

पहले भी तो लोग मरते थे

मगर आज 'मौत ' से इतना डर क्यूँ ?

पहले मौत का रखवाला

एक यमराज होता था -

मगर आज

एक इंसान, दूसरे इंसान के खून का

प्यासा हो गया है ,

तभी तो लगता है

आज कई इंसान यमराज हो गया है ।

Thursday, December 2, 2010

हक़ ,तन्हाई ,

हक़


किस -किस का शुक्रिया अदा करूँ

किस -किस का अहसान चुकाऊं

पहले ही मेरी जिन्दगी

अहसानों के बोझ से लद चुकी है ।

तुम मुझे अपना बनाकर

और ना अहसां लादो मुझपर

क्योंकि मरने के बाद भी

मेरी मिट्टी में

किसी और का हक़ होगा ।


तन्हाई


किस -किस मुकां से

गुज़रे हैं हम

कैसे बताएं आपको

मगर ,एक तन्हाई

इस कदर परेशां

किये जा रही है

क्यूँ ना बताएं आपको

पहले जब हम आपके

बहुत करीब थे , दिल तन्हां था

जब आज दिल आपके बहुत करीब है

हम तन्हां है .