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Friday, October 29, 2010

वजूद

क्या
वजूद के बिना
जीवन अधूरा है
क्या
वजूद ही सफलता का
मापदंड है !
औरों को गिराकर
कुछ पा लेना
क्या वजूद है -
क्या औरों की
दर्द / खुशी के लिए
कुछ खो देना ,
वजूद नहीं है
नामी की जिन्दगी हमेशा ,
वजूद नहीं हो सकती
और ना ही
गुमनामी की जिन्दगी को
हरदम , बिना वजूद के कहा जा सकता है
आखिर , वजूद को जाने कैसे -
मै - में लिपटा मेरा व्यक्तित्व वजूद नहीं है
हम - को दर्शाता मेरा व्यक्तित्व ही वजूद है
तभी तो कहा जाता है ,
वजूद नहीं , तो जीवन नहीं

1 comment:

ali said...

पाना...खोना , नाम...गुमनाम , मैं...हम , इन सभी को बिना वजूद के जाना ही नहीं जा सकता ! वजूद के बिना ये सब अर्थहीन हैं !
आपसे सौ फीसदी सहमत हूं !