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Thursday, October 28, 2010

स्वयं के आंकलन का तरीका

क्या खोया
महत्वहीन ,
अफ़सोस -
ऐसा नहीं होता /
ज्यादा पा लेता --
ज्यादा महत्वहीन
क्या बचा है ,
महत्वपूर्ण --
उसे लम्बे समय तक कैसे बचाएं /
कैसे ज्यादा बचाएं -
ज्यादा महत्वपूर्ण

5 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सही..

Vivek Rastogi said...

बिल्कुल बचाने पर ज्यादा सोचना चाहिये

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अन्तिम चार पंक्तियां बहुत अच्छी हैं>

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अंतिम चार पंक्तियां बहुत अच्छी हैं..

ali said...

बेहद आशावादी दर्शन ! विगत और आगत के मध्य सुसंगत बटवारा करता हुआ विचार ! सकारात्मक जीवन लक्ष्य के निर्धारण को प्रेरित करती रचना !