have faith in me and in my blog ....and.... i m sure u'll then start appreciating nature and small small things around yourself!!! so, FEEL FREE TO SUBSCRIBE & ENJOY!!!

Sunday, October 31, 2010

माँ की निगाहें

बच्चों की निगाहें
हरदम
शून्य में
निहारते रहती है
माँ को ।
क्योंकि
माँ की स्वप्निल निगाहें
हर लेती है
हर दुखों को
बच्चों की ।

Friday, October 29, 2010

वजूद

क्या
वजूद के बिना
जीवन अधूरा है
क्या
वजूद ही सफलता का
मापदंड है !
औरों को गिराकर
कुछ पा लेना
क्या वजूद है -
क्या औरों की
दर्द / खुशी के लिए
कुछ खो देना ,
वजूद नहीं है
नामी की जिन्दगी हमेशा ,
वजूद नहीं हो सकती
और ना ही
गुमनामी की जिन्दगी को
हरदम , बिना वजूद के कहा जा सकता है
आखिर , वजूद को जाने कैसे -
मै - में लिपटा मेरा व्यक्तित्व वजूद नहीं है
हम - को दर्शाता मेरा व्यक्तित्व ही वजूद है
तभी तो कहा जाता है ,
वजूद नहीं , तो जीवन नहीं

Thursday, October 28, 2010

स्वयं के आंकलन का तरीका

क्या खोया
महत्वहीन ,
अफ़सोस -
ऐसा नहीं होता /
ज्यादा पा लेता --
ज्यादा महत्वहीन
क्या बचा है ,
महत्वपूर्ण --
उसे लम्बे समय तक कैसे बचाएं /
कैसे ज्यादा बचाएं -
ज्यादा महत्वपूर्ण

Monday, October 25, 2010

एक बदनसीब इंसान

एक दर्दनाक चीख
अमीर के बंगले से टकराई ,
मगर पिघला ना सकी
उसके दिल को
कांक्रीट के दीवारों ने , रोक रखा था उसे
बुझा हुआ इंसान
छटपटाते हुए , गेट तक पहुंचा -
और तड़प -तड़प कर कहने लगा -----
मेरा बेटा मर गया है ,
कफ़न के लिए कुछ पैसे दे दो -
दया करो , रहम खाओ -
सुना तुमने -
मेरे बेटे का कसूर सिर्फ इतना था
उसने तुम्हारी फेक्टरी के बने
नकली दवा खाई थी
इक तो पैसे नहीं थे ,
दवा के लिए
जैसे -तैसे पैसे बटोरे
और उसे दवा खिलाई ,
अब मर गया है -
कफ़न के लिए पैसे कहाँ से लाऊं -
कुछ तो इंसाफ किया होता
नकली दवा में कुछ और मिलाया होता ,
मरने के बाद उसकी लाश भी ना बचती
और वह गल गया होता
कम से कम मुझ बदनसीब बाप को ;
तेरे दरवाजे पर
अपने बेटे के मौत के बदले
कफ़न ना मांगना पड़ता



Friday, October 8, 2010

प्यार

जिन्दगी
अब कितनी हंसी ,
खूबसूरत
लगने लगी है --
यकीं मानिये
जब से
आई हो --
जीवन में तुम
अब हमें भी
आपकी तरह
अपने आप से
प्यार करने को
जी चाहता है ।

Wednesday, October 6, 2010

अपरिग्रह

जैन दर्शन में अपरिग्रह का बहुत महत्व है । त्याग से इसका सीधा सम्बन्ध है । मैंने इसे इस प्रकार से परिभाषित किया है ---


अपरिग्रह
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जो चीज अपनी नहीं , उसका मोह कैसे

Tuesday, October 5, 2010

मौत

इंसान !
एक मौत
से बचने के लिए
हजारों कोशिशें
करता है
और
जिन्दा रहते हुए भी
हजारों बार
मरता है