have faith in me and in my blog ....and.... i m sure u'll then start appreciating nature and small small things around yourself!!! so, FEEL FREE TO SUBSCRIBE & ENJOY!!!

Wednesday, September 29, 2010

पर्यावरण संतुलन की जननी है -- शेरनी




ईक्कीसवीं सदी में
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में ,
शेरनी के अस्तित्व से
बाईसवीं सदी में
ईन्सान के सुखद
अस्तित्व की कल्पना
की जा सकती है।

( यह चित्र मेरी पुत्री एवं मेरे भतीजे ने जून २०१० में नेशनल पार्क में ली है )


1 comment:

ali said...

प्रकृति सभी जीव जंतुओं का सहअस्तित्व चाहती है ! हमें प्रकृति के मंतव्य से अनुकूलता स्थापित करनी ही होगी अन्यथा संतुलन का बिगाड़ हमारे स्वयं के बिगाड़ का कारण भी बन जाएगा !