have faith in me and in my blog ....and.... i m sure u'll then start appreciating nature and small small things around yourself!!! so, FEEL FREE TO SUBSCRIBE & ENJOY!!!

Thursday, September 2, 2010

तीर

हमने वक्त के
बदलते रूख को
पहचान लिया है ,

अब
इंतजार के तेरे
तीर -
हमें घायल नहीं -
कर सकते ।

4 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह क्या बात है ...


इस कदर
लगे हैं
तीर इंतज़ार के
कि
अब तीर लगने की
जगह ही
बाकी नहीं है ...

ali said...

समय 'बोध' जीवन की दिशायें बदल देता है !
चिंतनपरक विचार !

mera blog said...

ऐसा प्रतीत होता है जैसे आपने आईना रख दिया है, ऐसा लगा जैसे आपने मुझे ही कुछ कहा हो।

mera blog said...

http://www.kavitakosh.org/

कृपया अवलोकन करें।

आदर सहित

.अचिन्‍त्‍य