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Monday, August 9, 2010

चित्र भी एक सीख दे गई

बनाया है इस चित्र को ,
मेरी हमसफ़र ने ,
प्रकाशित नही कर रहा हूँ ,इसे इसलिए यहाँ -
लगी किसी को टोपी अच्छी , लगी किसी को झोपड़ी ;
लगी किसी को मुस्काराहट अच्छी ;
पर देखा जब मैंने बनते चित्र को ,
अंगुली में रुके ब्रुश को उस वक़्त तक ,
चलने का इशारा नहीं दिया जब तक मन ने मष्तिष्क को ;
बीत गए कई पल , चली नहीं अंगुली एक कदम ;
पढ़ाया पाठ धीरज का मुझे
बनकर चित्र


(निकिता ने जानना चाहा पेंटिंग किसने बनाई है ,चित्र मेरी हमसफ़र माने मेरी पत्नी श्रीमती संजू सांखला ने )

3 comments:

'उदय' said...

... बहुत सुन्दर !!!

ali said...

सबसे पहली प्रतिक्रिया तो ये कि चितेरा साधुवाद का पात्र है ! रंगों से भावों को उकेरना हंसी खेल नहीं है ! यहां तो हर चीज़ जैसे...बोल रही है ! अब देखिये ना वो अंगुली भी बोली ! आपने सुना ,मैंने भी सुना !

nikita said...

painting is damn beautiful...who made this??