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Wednesday, August 25, 2010

कीमत

हरतरफ रौशनी से
घिरे हैं हम ,
रौशनी की कीमत -
क्या बताये हम
कभी जाके पूछो उनसे ,
जो अंधेरों की दुनिया को
रौशनी की दुनिया समझकर
जीते हैं ---
एक -रौशनी यदि
मिल जाये उन्हें
तो अँधेरे की दुनिया का
रास्ता कहाँ से लाये वो .

2 comments:

neelam chand sankhla said...
This comment has been removed by the author.
ali said...

रौशनी की कद्र वे कहां जानते हैं जिनके जेहन अंधेरों में लिपटे होते हैं ! उजाले और अंधेरों की परख , निगाहों से पहले दिलों और दिमागों की दुनिया में तय होनी चाहिए ! जिनके अंतर्मन अंधेरों में हों वे उजालों की कीमत कैसे जानेगे ? रौशनी और रास्तों को आलोकित अंतर्मन की दरकार होती है !
सुन्दर अभिव्यक्ति !