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Wednesday, August 11, 2010

अहसास

हर माँ को
उसके बच्चे की निगाहें
तलासते रहती है
कहीं शून्य में ,
माँ नज़र जाये -
और अहसास दिला जाये
हाँ बेटा , मैं तेरे करीब हूँ ,
तू सो जा ---
किन्तु माँ कहती है
मुझे अभी नींद नहीं आयेगी -
क्योंकि तेरे दर्द का अहसास
मेरे सीने में जिन्दा है ,
उसके बुझने के बाद
मैं सोऊंगी --
चाहे लाख बरस जागना पड़े ,
मै जागते हुए उसके बुझने का
इंतजार करूंगी --
तू मेरी फ़िक्र मतकर
में जागते हुए --
तेरी नींद के अहसास में
गहरी नींद सो लूंगी .

3 comments:

sanu shukla said...

bahut sundar..bhavpoorn..!!

ali said...

मां के प्रति सच्ची कृतज्ञता यही है कि उसे सही परिप्रेक्ष्य में देखा जाये !
मां के मनोभावों का सम्यक प्रस्तुतिकरण !

'उदय' said...

... bhaavpoorn rachanaa !!!