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Sunday, August 8, 2010

एक बात दिल से --एक आस ------एक पल के लिए

हर पल
समर्पण में
बिताऊंगा ,
उधेड़बुन से निजाद
पाऊंगा ।
एक पल अब
उनके साथ ,
सुकूँ से
बिता पाउँगा ।


( कल की एक कविता के सम्बन्ध में अली साहब की समालोचात्मक प्रतिक्रिया - सुकूँ --शब्द ने आज
की कविता को जन्म दिया है । और प्रकृति की सीख को उजागर किया है ----मेरे शब्दों में -----
------हर पल
प्रकृति सीख दे जाती है ,
सुकूँ शब्द ने
उधेड़बुन से
निजाद पाने
पाने की सीख दी है ,
वह भी तो अली -साहब
की कलम से ,
प्रकृति की
सीख ही तो है । ------

1 comment:

ali said...

आप में एक खास बात है ! वो ये कि आप अपने आपको प्रकृति से बाहर नहीं देखते ! सच तो ये है कि प्रकृति से बड़ा कोई जादूगर भी नहीं जो दुनिया को इतने सलीके से संचालित कर सके !
ये प्रकृति ही तो है जो हमारे बाहर चारों ओर...और हमारे अंदर के संसार में रंग भरती है.
आपका आभार !