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Saturday, August 7, 2010

दिल की बात --हमसफ़र के लिए -----एक पल

एक पल
उनके साथ
होने को जी चाहता है ।
एक पल
सुकून का
बिताने को जी चाहता है ,
हर पल मेरा
उधेड़ - बुन में
लगा है -----
वह एक -पल ,
समर्पण का
लाऊँ कहाँ से ।

3 comments:

ali said...

सारी दिक्कतें उधेड़बुन से समर्पण तक का मार्ग तय करने में हैं ! पल पल का हिसाब बड़ा रुचिकर लगा !


[ उचित समझियेगा तो शुकून को सुकून या सुकूँ कर दीजियेगा ]

'उदय' said...

... bhaavpoorn rachanaa !!!

संगीता पुरी said...

उधेडबुन में ही तो सारा समय नष्‍ट हो जाता है .. सुंदर अभिव्‍यक्ति !!