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Monday, August 30, 2010

प्रकृति की अदभुत निगाहें

प्रकृति ने
"आंवला " और " तेंदू "
दोनों को
विटामिन -सी प्रचुर मात्रा मे दी है
किन्तु
आंवला को ज्यादा सुंदर बनाया है ,
यदि तेंदू भी सुंदर होता ,
आंवले की तरह
अमीर जरूरत ना होने पर भी
उसे खरीद लाते
फिर गरीब विटामिन -सी
कहाँ से पाते।

आंवला और तेंदू दो फलों के माध्यम से प्रकृति ने मुझे सीख दी है ,उसे में अमीरों के अवांछित संचय पर ध्यान आकर्षित कराकर , प्रकृति की इस महानता पर लोगों की निगाहें ले जाना चाहता हूँ , कि प्रकृति ने अमीर से ज्यादा गरीबों पर ध्यान दिया है , और सूरत से ज्यादा सीरत पर जोर दिया है

Wednesday, August 25, 2010

कीमत

हरतरफ रौशनी से
घिरे हैं हम ,
रौशनी की कीमत -
क्या बताये हम
कभी जाके पूछो उनसे ,
जो अंधेरों की दुनिया को
रौशनी की दुनिया समझकर
जीते हैं ---
एक -रौशनी यदि
मिल जाये उन्हें
तो अँधेरे की दुनिया का
रास्ता कहाँ से लाये वो .

Thursday, August 12, 2010

काल के साथ बात का अर्थ बदलता है

कल का वर्तमान
आज जो अतीत है ,
कल कुछ और कहता था --
आज कुछ और बता रहा है
आज का वर्तमान
जो कल अतीत होगा ,
कल के वर्तमान को
कुछ और बताएगा

jeet

जीत
सिर्फ
पा लेना
नहीं है ,
यदि हमें
नया रास्ता
दिखता है --
और हम उसपर
चल पडतें हैं ,
तो यह भी
हमारी
जीत है


( अहसास की कविता पर जब मैंने श्री सनु शुक्ला की प्रतिक्रिया पढकर उनका ब्लॉग देखा , तब मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी की , चाहत , पाने से ज्यादा दिल की खुशी है , उसी पल मेरे मन में विचार आया और मैंने उक्त कविता लिख दी । अब आप ही बताइए आप जीत के रास्ते पर चल पड़े हैं या नहीं । धन्यवाद । )

Wednesday, August 11, 2010

अहसास

हर माँ को
उसके बच्चे की निगाहें
तलासते रहती है
कहीं शून्य में ,
माँ नज़र जाये -
और अहसास दिला जाये
हाँ बेटा , मैं तेरे करीब हूँ ,
तू सो जा ---
किन्तु माँ कहती है
मुझे अभी नींद नहीं आयेगी -
क्योंकि तेरे दर्द का अहसास
मेरे सीने में जिन्दा है ,
उसके बुझने के बाद
मैं सोऊंगी --
चाहे लाख बरस जागना पड़े ,
मै जागते हुए उसके बुझने का
इंतजार करूंगी --
तू मेरी फ़िक्र मतकर
में जागते हुए --
तेरी नींद के अहसास में
गहरी नींद सो लूंगी .

Monday, August 9, 2010

चित्र भी एक सीख दे गई

बनाया है इस चित्र को ,
मेरी हमसफ़र ने ,
प्रकाशित नही कर रहा हूँ ,इसे इसलिए यहाँ -
लगी किसी को टोपी अच्छी , लगी किसी को झोपड़ी ;
लगी किसी को मुस्काराहट अच्छी ;
पर देखा जब मैंने बनते चित्र को ,
अंगुली में रुके ब्रुश को उस वक़्त तक ,
चलने का इशारा नहीं दिया जब तक मन ने मष्तिष्क को ;
बीत गए कई पल , चली नहीं अंगुली एक कदम ;
पढ़ाया पाठ धीरज का मुझे
बनकर चित्र


(निकिता ने जानना चाहा पेंटिंग किसने बनाई है ,चित्र मेरी हमसफ़र माने मेरी पत्नी श्रीमती संजू सांखला ने )

Sunday, August 8, 2010

एक बात दिल से --एक आस ------एक पल के लिए

हर पल
समर्पण में
बिताऊंगा ,
उधेड़बुन से निजाद
पाऊंगा ।
एक पल अब
उनके साथ ,
सुकूँ से
बिता पाउँगा ।


( कल की एक कविता के सम्बन्ध में अली साहब की समालोचात्मक प्रतिक्रिया - सुकूँ --शब्द ने आज
की कविता को जन्म दिया है । और प्रकृति की सीख को उजागर किया है ----मेरे शब्दों में -----
------हर पल
प्रकृति सीख दे जाती है ,
सुकूँ शब्द ने
उधेड़बुन से
निजाद पाने
पाने की सीख दी है ,
वह भी तो अली -साहब
की कलम से ,
प्रकृति की
सीख ही तो है । ------

Saturday, August 7, 2010

दिल की बात --हमसफ़र के लिए -----एक पल

एक पल
उनके साथ
होने को जी चाहता है ।
एक पल
सुकून का
बिताने को जी चाहता है ,
हर पल मेरा
उधेड़ - बुन में
लगा है -----
वह एक -पल ,
समर्पण का
लाऊँ कहाँ से ।

Thursday, August 5, 2010

मेरा प्यारा गाँव छुईखदान

इस ब्रम्हांड मै ,
प्यारी हमारी धरती मां
इस धरा के खूबसूरत देश --हिन्दुस्तान
की धड़कन में बसा
छत्तीसगढ़ राज्य है ।
छत्तीसगढ़ का शालीन
जिला राजनांदगाँव
की आत्मा में बसा
मेरा प्यारा गाँव छुईखदान है ।
पीली छुई जो घरों को संवारती है
उसी छुई के खदान ने नाम दिया है -
मेरे गाँव को छुईखदान ।

Tuesday, August 3, 2010

विश्वास

तू नहीं मिली मुझे
जमीं पर ,
खोजता फिरू ---
अब तुझे --
मगर कहाँ ,
आसमां के उस पार
या जमीं के अंदर ,
लगता नहीं
मिलन होगा ---कभी अपना
फिर भी मुझे -
विश्वास है ----
मन में ।