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Sunday, July 18, 2010

रफ़्तार

इन्सान जिस तेज रफ़्तार से
आसंमा की ओर
बढ़ रहा है ,
उससे कहीं -
तेज रफ़्तार से वह ,
प्यार , दर्द और अपनापन
भूलता जा रहा है ।

2 comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

...प्रसंशनीय !!!

ali said...

कथित विकास की ऊंचाई बनाम नैतिक / सामाजिक / मानवीय अधपतन का अच्छा रेखा चित्र खींचा है आपने ! सुन्दर अभिव्यक्ति !