have faith in me and in my blog ....and.... i m sure u'll then start appreciating nature and small small things around yourself!!! so, FEEL FREE TO SUBSCRIBE & ENJOY!!!

Saturday, July 31, 2010

खूबसूरत ----

तू खूबसूरत
तेरी हर अदाएं खूबसूरत
तेरी चाल खूबसूरत
तेरी आँखें खूबसूरत ।

ऐ खूबसूरत -
जरा देख ईधर
मैं बदसूरत -
तेरे दिल की तरह ,
मेरा दिल खूबसूरत तेरी तरह ।

मेरा दिल तूने जलाया है
बदसूरत इसे बनाया है
दोनों का दिल बदसूरत ,
अब दूरी क्यूँ खूबसूरत ।

Tuesday, July 27, 2010

कब्र

जिन्दा
लाशों की
कब्र
का प्रतीक,
कर्फ्यु ग्रस्त
शहर का
हर
चौराहा ।

( चित्र गूगल से साभार )

Sunday, July 25, 2010

चौराहा







(चित्र गूगल से आभार । )

मैं दो राहे
पर नहीं ,
चौराहे पर
खड़ा हूँ ।
दो राहे पर
तो एक रास्ता -
जिन्दगी को
तो दूसरा रास्ता
मौत को जाता है ।
चौराहे पर
एक रास्ता
जिन्दगी से बड़ा
तेरा साथ है ,
तो दूसरा
मौत से बड़ी
तेरी जुदाई का
रास्ता है ।

Friday, July 23, 2010

माँ माने-----

जब
सारे
दोस्त ,
और
अपने ---
मुह मोड़ ले ----
तब
माँ --माने
दोस्ती का अहसास ।

Thursday, July 22, 2010

याद

-----------------------
आज
याद
क्या आई
उनकी ,
कब्र -
से उठ कर
आंसू
बहाने लगे ।
-----------नीलम---

Tuesday, July 20, 2010

सजा

किसी की गल्ती की
इतनी सजा ,
ना दे --' नीलम '
कहीं उस बदनशीब
के पास पश्चाताप ,
के लिए -
दो वक्त ,
भी ना हो ।

Sunday, July 18, 2010

रफ़्तार

इन्सान जिस तेज रफ़्तार से
आसंमा की ओर
बढ़ रहा है ,
उससे कहीं -
तेज रफ़्तार से वह ,
प्यार , दर्द और अपनापन
भूलता जा रहा है ।

Sunday, July 11, 2010

खुशियाँ

क्यूँ
हम
खुशियाँ पाने
दर - दर
भटकते हैं ,
प्रकृति
की गोद में
जाकर बैठो
और
देखो
कितनी
खुशियाँ
संजोये
बैठी है
हमारे लिए ।







चित्र गूगल से साभार

Saturday, July 10, 2010

मुकेश माथुर - श्रधांजलि

मुकेश
कोई शब्द नहीं
अनुभूति है दर्द की ,
वो गीत ही क्या ,
जिसमे कशिश नहीं ,
वो आवाज ही क्या
जो मुकेश की नहीं

मुकेश मेरा प्रिय गायक है । मुझे मुकेश के गीत बचपन से प्रिय है , क्योकि उनके गीत सिर्फ गीत नहीं बल्कि गीत मुझे प्रकृति से है जोड़ा है और जीने की कला भी दी है
हरी - भरी वसुंधरा ,है नीला -नीला ये गगन , ये किस कवि की कल्पना , ये किस कवि की कल्पना ये कौन चित्रकार है ....
प्रकृति का इतना सुंदर चित्रण मुकेश की आवाज का जादू नहीं ,तो और क्या है । मेरे गाँव छुईखदान में Dauram महोबियाजी का एक टूरिंग टाकीज था , उस टाकीज मेफिल्म चालू होने के ठीक पहले आरती का गीत बजता था और उसके ठीक पहले मुकेश का एक गीत बजता था , मेरे घर के छत से अक्सर में वो गीत सुनता था ----चल -अकेला , चल -अकेला -तेरा मेला छूटा राही , तू चल अकेला -------मुकेश ने उस गीत को इस अंदाज मे गया है , जिससे जीवन दर्शन का सहज रूप मे अहसाश हो जाता है । इस लिए मैं कहता हूँ , मुकेश के गाये गीत मेरे लिए जीवन दर्शन की एक राह है ।