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Wednesday, May 25, 2011

याद

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सूर्यास्त का वक्त
समुद्र का छोर ,
गुलशन की महक ,
प्रकृति --
अपनी सुन्दरता
बिखेर रही थी ।
उस वक्त मैं
वहीं लेटा हुआ
प्रकृति की सुन्दरता को
निहार रहा था ।
मन प्रफुल्लित ,
दिल खुश था ।
तभी पायल की
झंकार ने मुझे
अपनी ओर आक्रिस्ट की
मैं एकाएक चौंका
दिल की धरकन बढने लगी
जिस्म कांप उठा
जुबान रुक गए
और मेरी आँखें
उसे एक टक
यूँ देखने लगी
जैसे मेरी मनचाही
मुराद पूरी हो गयी हो ।
और मैं खुशी के मारे
बाँहों में बाहें डालकर
वहीँ एक ओर लेट गया
तभी मुझे लगा
वो
भीग गयी
मैं उसके जिस्म से
पानी पोछने लगा
तभी एक बार और चौंका
नींद से जागा
और देखा
मैं जिसके जिस्म से
पानी पोंछ रहा था
वो --कोई मन चाही
मुराद नहीं थी
बल्कि
बिस्तर का एक छोर था
जो उसकी याद में
मेरे आंसूओं से
भीग गए थे ।

2 comments:

daanish said...

तो
ख्यालों में खो जाना
ऐसी कविताएँ लिखवा जाता है
बहुत खूब !

Mrs. Asha Joglekar said...

क्या बात है । बहुत खूब ।