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Sunday, May 8, 2011

माँ माँ होती है --

एक बच्चे के लिए , उसका पिता
दोस्त या दुश्मन हो सकता है ।
दोस्त कभी दुश्मन , दुश्मन कभी दोस्त हो सकता है
अपने पराये , पराये अपने हो सकते है ।
वह आज कुछ और है , कल कुछ और हो सकता है ।
मैं आज कुछ और हूँ , कल कुछ और हो सकता हूँ ।
माँ - जो कल माँ थी ,
आज भी माँ है ,
कल भी माँ रहेगी ।
एक पिता के लिए उसका बेटा ,
सपूत या कपूत हो सकता है ।
एक सपूत या कपूत बेटे के लिए ,
माँ --माँ होती है ।
एक बच्चे के लिए उसकी माँ ,
अच्छी या बुरी हो सकती है ।
अच्छे या बुरे बच्चे के लिए ,
माँ --माँ होती है ।
माँ का कोई अर्थ नहीं ,
माँ के लिए , कोई शब्द नहीं ,
माँ -- माँ होती है , माँ होती है ।

14 comments:

ali said...

मां के लिए हर इंसान की सोच अलग हो सकती है जैसे...कई बार प्रकृति और विधाता में कोई अंतर नहीं कर पाता हूँ मैं ... तब मेरे लिए मां , केवल एक शब्द नहीं रह जाती बल्कि शब्दातीत हो जाती है ... और कुछ लोग , ऐसे भी ...जिनके लिए मां शब्द तो क्या कुछ भी नहीं होती !

( प्रकृति और मां के सम्बन्ध में आपके विचार अच्छे लगे )

ali said...

मां के लिए हर इंसान की सोच अलग हो सकती है जैसे... कई बार प्रकृति और विधाता में कोई अंतर नहीं कर पाता हूँ मैं ... तब मेरे लिए मां , केवल एक शब्द नहीं रह जाती बल्कि शब्दातीत हो जाती है .. और कुछ लोग , ऐसे भी ...जिनके लिए मां शब्द तो क्या कुछ भी नहीं होती !

( प्रकृति और मां के सम्बन्ध में आपके विचार अच्छे लगे )

अनामिका की सदाये...... said...

maa ko varnan nahi kiya ja sakta.
sunder rachna.

श्यामल सुमन said...

सचमुच माँ तो माँ होती है। सुन्दर भाव की रचना।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

आदरणीय सांखला जी पाठकों का कहना है कि इस ब्‍लाग में टिप्‍पणी करने में समस्‍या आ रही है.

शरद कोकास said...

ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है ।
शरद कोकास - दुर्ग

मोहन वशिष्‍ठ 9991428447 said...

are bhai aapke blog ka font to aa hi nahi raha padhne me kya karen

Udan Tashtari said...

माँ बस माँ होती है...सुन्दर अभिव्यक्ति!!

main... ratnakar said...

very touchy lines. u really have a spark in writting, keep it up
all the best
ratnakar tripathi
www.mainratnakar.blogspot.com

neelam chand sankhla said...

aap sabhi ko bahot bahot dhanyavad.

Anonymous said...

ur kavita rocks!

SELECTION - COLLECTION SELECTION & COLLECTION said...

जननी के दुग्ध की इक इक बूँद अनमोल है
जिसका मोल प्रकृति भी चुका सकती नही

सृष्टि की जननी और प्रकृति की पहरेदार है
अगर माँ नही होती तो दुनिया बचती नही

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

Dr. Purushottam Lal Meena Editor PRESSPALIKA said...

खुद्दार एवं देशभक्त लोगों का स्वागत है!
सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत और सम्मान करना प्रत्येक भारतीय नागरिक का नैतिक कर्त्तव्य है। इसलिये हम प्रत्येक सृजनात्कम कार्य करने वाले के प्रशंसक एवं समर्थक हैं, खोखले आदर्श कागजी या अन्तरजाल के घोडे दौडाने से न तो मंजिल मिलती हैं और न बदलाव लाया जा सकता है। बदलाव के लिये नाइंसाफी के खिलाफ संघर्ष ही एक मात्र रास्ता है।

अतः समाज सेवा या जागरूकता या किसी भी क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को जानना बेहद जरूरी है कि इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम होता जा है। सरकार द्वारा जनता से टेक्स वूसला जाता है, देश का विकास एवं समाज का उत्थान करने के साथ-साथ जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों द्वारा इस देश को और देश के लोकतन्त्र को हर तरह से पंगु बना दिया है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, व्यवहार में लोक स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को भ्रष्टाचार के जरिये डकारना और जनता पर अत्याचार करना प्रशासन ने अपना कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं। ऐसे में, मैं प्रत्येक बुद्धिजीवी, संवेदनशील, सृजनशील, खुद्दार, देशभक्त और देश तथा अपने एवं भावी पीढियों के वर्तमान व भविष्य के प्रति संजीदा व्यक्ति से पूछना चाहता हूँ कि केवल दिखावटी बातें करके और अच्छी-अच्छी बातें लिखकर क्या हम हमारे मकसद में कामयाब हो सकते हैं? हमें समझना होगा कि आज देश में तानाशाही, जासूसी, नक्सलवाद, लूट, आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका एक बडा कारण है, भारतीय प्रशासनिक सेवा के भ्रष्ट अफसरों के हाथ देश की सत्ता का होना।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-"भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान" (बास)- के सत्रह राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से मैं दूसरा सवाल आपके समक्ष यह भी प्रस्तुत कर रहा हूँ कि-सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! क्या हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवक से लोक स्वामी बन बैठे अफसरों) को यों हीं सहते रहेंगे?

जो भी व्यक्ति इस संगठन से जुडना चाहे उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्त करने के लिये निम्न पते पर लिखें या फोन पर बात करें :
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष
भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666
E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in