its about nature basically,but have other related poetries ...i m sure when u'll read it u'll find ur innerself more open and closer to urself.....u'll then start appreciating the small things around u!!!have faith!!!
a little description of prakriti by me goes as
विधाता का
सुन्दर सृजन है -
प्रकृति।
प्रकृति की उपहार है -
माँ॥
माँ ही प्रकृति है ,
प्रकृति ही माँ ॥
-नीलम चंद सांखला
Sunday, July 25, 2010
चौराहा
(चित्र गूगल से आभार । )
मैं दो राहे पर नहीं , चौराहे पर खड़ा हूँ । दो राहे पर तो एक रास्ता - जिन्दगी को तो दूसरा रास्ता मौत को जाता है । चौराहे पर एक रास्ता जिन्दगी से बड़ा तेरा साथ है , तो दूसरा मौत से बड़ी तेरी जुदाई का रास्ता है ।
2 comments:
गहरे सांकेतिक निहितार्थ जगाती कविता ! चौराहों के भ्रम / इंसानों के सहजीवन /जीवन / म्रत्यु / विछोह में कितने भाव छुपे हैं !
ati uttam...!!!is fantabulous!
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