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Sunday, July 25, 2010

चौराहा







(चित्र गूगल से आभार । )

मैं दो राहे
पर नहीं ,
चौराहे पर
खड़ा हूँ ।
दो राहे पर
तो एक रास्ता -
जिन्दगी को
तो दूसरा रास्ता
मौत को जाता है ।
चौराहे पर
एक रास्ता
जिन्दगी से बड़ा
तेरा साथ है ,
तो दूसरा
मौत से बड़ी
तेरी जुदाई का
रास्ता है ।

2 comments:

ali said...

गहरे सांकेतिक निहितार्थ जगाती कविता ! चौराहों के भ्रम / इंसानों के सहजीवन /जीवन / म्रत्यु / विछोह में कितने भाव छुपे हैं !

Anonymous said...

ati uttam...!!!is fantabulous!