Sunday, July 11, 2010

खुशियाँ

क्यूँ
हम
खुशियाँ पाने
दर - दर
भटकते हैं ,
प्रकृति
की गोद में
जाकर बैठो
और
देखो
कितनी
खुशियाँ
संजोये
बैठी है
हमारे लिए ।







चित्र गूगल से साभार

1 comment:

Anonymous said...

:)