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Wednesday, February 24, 2010

गुलाब एक फूल

गुलाब
एक फूल
यदि इन्सान की तरह ,
सोंचता -
तो शायद ,
इतना खिला , सुगन्धित
कभी नहीं होता।
फूल भी -
अपने जिस्म में
इन्सान की तरह,
जहर घोलने लगता
जो निश्चित ही उसे
जड़ से खोखला कर

गमले से गिरा देता
(चित्र गूगल से आभार ।)

9 comments:

दिलीप said...

sundar bhaav sanjoye hai aapne...

सुनील दत्त said...

जबरदस्त

nilesh mathur said...

बेहतरीन पंक्तिया है, भाव भी बेहतरीन है!

indli said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

Jandunia said...

nice

Udan Tashtari said...

सही कहा..बढ़िया अभिव्यक्ति!

E-Guru Rajeev said...

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !


"टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

ali said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ! चिंतन परक !

ali said...

टिप्पणी के लिये शब्द पुष्टिकरण हटाकर अच्छा किया आपने !