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Wednesday, February 24, 2010

गुलाब एक फूल

गुलाब
एक फूल
यदि इन्सान की तरह ,
सोंचता -
तो शायद ,
इतना खिला , सुगन्धित
कभी नहीं होता।
फूल भी -
अपने जिस्म में
इन्सान की तरह,
जहर घोलने लगता
जो निश्चित ही उसे
जड़ से खोखला कर

गमले से गिरा देता
(चित्र गूगल से आभार ।)

Sunday, February 7, 2010

हमसफ़र

मैंने
जीवन के सफ़र में
उस रोज से
तुम्हें
अपना हमसफ़र
मान लिया है ,
जब मैंने
तुम्हे नहीं ,
तुम्हारी -
परछाई को देखा था ।

------------------नीलम ----------

Saturday, February 6, 2010

धापी नीड़

" *धापी नीड़ "
माने
माँ के आँचल तले बसकर
माँ के गोद में पलना है
और कुछ नहीं ।

* धापी मेरी माँ का नाम है।

नीड़


नीड़
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नीड़ माने सिर्फ ,
घोसला नहीं ।
नीड़ माने सिर्फ
बसेरा नहीं ।
नीड़ माने -
माँ के आँचल तले
बसेरा है ।
(यह चित्र गूगल से साभार )


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Friday, February 5, 2010

प्रकृति

विधाता का
सुन्दर सृजन है -
प्रकृति।
प्रकृति की उपहार है -
माँ॥
माँ ही प्रकृति है ,
प्रकृति ही माँ ॥