have faith in me and in my blog ....and.... i m sure u'll then start appreciating nature and small small things around yourself!!! so, FEEL FREE TO SUBSCRIBE & ENJOY!!!

Friday, December 31, 2010

नया वर्ष मंगलमय हो

नए और पुराने
ख्वाब की
परिणिती की डगर है ,
नूतन वर्ष २०११।
मंगलमय हो ,
नूतन वर्ष

नये वर्ष २०११ की हार्दिक शुभकामनायें

नयी वर्ष २०११ -एक उम्मीद
----------------------------------------------
किस कदर गुज़री जिन्दगी
हमें याद नहीं
हमें ना गम , ना शिकवा बीते ज़िन्दगी की
माना लाख गल्तियाँ की हमने,
सौ ज़ख्म खाए हमने
फिर भी , कोसों दूर रहा मंजिल हमसे
आज इसी उम्मीद में
अपने आप को नये वर्ष में ले जा रहा हूँ ,
माँ की निगाहों से , नये वर्ष की नयी सुबह की, नई किरण को देखूंगा
और हर एक -पल , नई आशा के साथ बिताऊंगा
और कुछ कर दिखाऊंगा
मंजिल तक ज़रूर पहुँच जाऊंगा ,
मंजिल तक ज़रूर पहुँच जाऊंगा

Friday, December 24, 2010

माँ का आँचल

माँ
सागर है प्यार का
माँ
दोस्तों की दोस्त है
माँ
दर्द हरने वाली दवा की खान है
माँ
जीवन का सच है
माँ
रौशनी की राह है
माँ , के आँचल के कोने में
सागर सा प्यार है
माँ के आँचल में ,
ज़न्नत का प्यार है
सागर की शांत फिंजा भी
माँ के आँचल को तरसता है
कहीं ज्वार -भाटा उसे
अशांत ना कर दे ।

Wednesday, December 15, 2010

सम्बन्ध

इंसान ने जितना सम्बन्ध

भौतिकता से जोड़ा है ,

उससे कहीं ज्यादा

अपनों से तोडा है ।



सम्बन्ध


सत्य का वास्तविकता से

उतना ही गहरा सम्बन्ध है ,

जितना गहरा सम्बन्ध

जीवन का मृत्यु से ।

Thursday, December 9, 2010

इंसान और यमराज

हर -तरफ अन्धेरा है

मौत का साया

हर जिन्दा दिलों को डस रही है

'मौत ' कोई नयी बात तो नहीं ,

पहले भी तो लोग मरते थे

मगर आज 'मौत ' से इतना डर क्यूँ ?

पहले मौत का रखवाला

एक यमराज होता था -

मगर आज

एक इंसान, दूसरे इंसान के खून का

प्यासा हो गया है ,

तभी तो लगता है

आज कई इंसान यमराज हो गया है ।

Thursday, December 2, 2010

हक़ ,तन्हाई ,

हक़


किस -किस का शुक्रिया अदा करूँ

किस -किस का अहसान चुकाऊं

पहले ही मेरी जिन्दगी

अहसानों के बोझ से लद चुकी है ।

तुम मुझे अपना बनाकर

और ना अहसां लादो मुझपर

क्योंकि मरने के बाद भी

मेरी मिट्टी में

किसी और का हक़ होगा ।


तन्हाई


किस -किस मुकां से

गुज़रे हैं हम

कैसे बताएं आपको

मगर ,एक तन्हाई

इस कदर परेशां

किये जा रही है

क्यूँ ना बताएं आपको

पहले जब हम आपके

बहुत करीब थे , दिल तन्हां था

जब आज दिल आपके बहुत करीब है

हम तन्हां है .


Sunday, November 28, 2010

खामोशी , चाह , आदत

खामोशी
जब भी मेरी निगाहें
उनके निगाहों से
टकराती है ।
एक अजीब सी हलचल
दिल में होती है ।
तभी हवा का झोंका
कानों में कुछ कह जाता है
निगाहें - निगाहों की बात
समझ गए हैं ,
मगर उनके होंठ
हमारी तरह ही खामोश है ।
चाह
जब से आयी हो तुम
मेरी जिन्दगी में
हर चीज़
प्यारा लगने लगा है
हर चीज़ से
प्यार करने को
जी चाहता है ।
आदत
सारा जहां
बदल गया ,
तुम बदल गई
मैं बदल गया
नहीं बदला तो
सिर्फ मेरी आदत
पहले तुमसे
जागते हुए मिलने की
आदत थी ,
अब
ख्वाबों में मिलने की
आदत है ।



Tuesday, November 23, 2010

वक्त , याद, इंतजार

वक्त
---------
अब
वक्त
ऐसे
गुज़र रहा है ,
मानों हम
कई
सदियों से
जी रहें हैं ।
याद
-------
समय का एक -एक पल
मेरी जिन्दगी को
इस तरह मिटा रही है ,
जैसे
उसकी यादों में , मै
अपने आप को
हर -पल मिटा रहा हूँ ।
इंतजार
--------
पहले भी कुछ इंतजार था
अब भी कुछ इंतजार है ,
पहले जिन्दगी की चाह थी
अब मौत का इंतजार है ।

--------------------

अली साहब की प्रतिक्रिया अपने आप में कविता के भाव को एक शब्द में व्यक्त करने की ताकत रखती है । मौत ना तो पूरी तरह निराशा को प्रगत करती है और ना तो पूरी तरह मौत की सच्चाई को बयां करती है , बल्की प्रकृति की निगाह में जीवन की सच्चाई भी बयां करती है ।

--------------------------------------------------------

Sunday, November 21, 2010

अपेक्षाएं और खींज

--------------------------

अपेक्षाएं और खींज़

समानांतर चलती है ।

ना हम अपेक्षाएं करें

ना हमें खींज़ होगी ।

खींज़ अपेक्षा से ,

सौ गुना तेज चलती है ।

सौ प्रतिशत खींज़ से ,

मुक्ति चाहतें हैं ।

तो मन को समझाकर,

एक प्रतिशत

अपेक्षा को गति ना दे ।

Sunday, November 14, 2010

आज का इंसान

एक इंसान
अपने जिस्म के हजारों टुकड़े करके ,
अनुभव करने की कोशिश कर रहा है ,
दर्द को ।
खोज रहा है , ईमानदारी को -
आखिर कहाँ छिपी है ,
इंसानियत !
हैरान है खोजते - खोजते
दर्द गया कहाँ ?
सोचने में मजबूर , क्या आज के इंसान के लिए
दर्द की अनुभूति आवश्यक नहीं ,
क्या अपने आप से गिरकर जीना ही -
आज के इंसान की इंसानियत है ।

Friday, November 5, 2010

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

आपके जीवन में
अनगिनत दीप जल रहें है -
एक दीप आपकी आशा के
एक दीप आपकी खुशी के
एक दीप आपकी शांती के
एक दीप आपके स्नेह के
एक दीप आपके यश के
एक दीप आपके समर्पण के
एक दीप गुरू कृपा के ।
मैंने बरसों पहले , दीप - पर्व के अवसर पर
अपने घर छुईखदान में कई दीप जलाये थे ,
तभी माँ ( बाई ) मुझे पुकार कर कही थी
' नीलम ' गाय के कोठे में दीप जला आना
में गाय के कोठे में दीप जला आया
और मैंने उस दीप में चमकती रोशनी के साथ शांती देखी ,
और लौटकर आने पर
हर जलाये अपने दीप को देखे
रोशनी में चमक और वातावरण सुखद पाया ।
आपके अनगिनत दीपों में एक दीप मेरा भी , माँ के बताये राह वाला ,
जो आपके हर दीपों की रोशनी को ,
हजारों गुना बढ़ा दे ।
इसी कामना के साथ , दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

Sunday, October 31, 2010

माँ की निगाहें

बच्चों की निगाहें
हरदम
शून्य में
निहारते रहती है
माँ को ।
क्योंकि
माँ की स्वप्निल निगाहें
हर लेती है
हर दुखों को
बच्चों की ।

Friday, October 29, 2010

वजूद

क्या
वजूद के बिना
जीवन अधूरा है
क्या
वजूद ही सफलता का
मापदंड है !
औरों को गिराकर
कुछ पा लेना
क्या वजूद है -
क्या औरों की
दर्द / खुशी के लिए
कुछ खो देना ,
वजूद नहीं है
नामी की जिन्दगी हमेशा ,
वजूद नहीं हो सकती
और ना ही
गुमनामी की जिन्दगी को
हरदम , बिना वजूद के कहा जा सकता है
आखिर , वजूद को जाने कैसे -
मै - में लिपटा मेरा व्यक्तित्व वजूद नहीं है
हम - को दर्शाता मेरा व्यक्तित्व ही वजूद है
तभी तो कहा जाता है ,
वजूद नहीं , तो जीवन नहीं

Thursday, October 28, 2010

स्वयं के आंकलन का तरीका

क्या खोया
महत्वहीन ,
अफ़सोस -
ऐसा नहीं होता /
ज्यादा पा लेता --
ज्यादा महत्वहीन
क्या बचा है ,
महत्वपूर्ण --
उसे लम्बे समय तक कैसे बचाएं /
कैसे ज्यादा बचाएं -
ज्यादा महत्वपूर्ण

Monday, October 25, 2010

एक बदनसीब इंसान

एक दर्दनाक चीख
अमीर के बंगले से टकराई ,
मगर पिघला ना सकी
उसके दिल को
कांक्रीट के दीवारों ने , रोक रखा था उसे
बुझा हुआ इंसान
छटपटाते हुए , गेट तक पहुंचा -
और तड़प -तड़प कर कहने लगा -----
मेरा बेटा मर गया है ,
कफ़न के लिए कुछ पैसे दे दो -
दया करो , रहम खाओ -
सुना तुमने -
मेरे बेटे का कसूर सिर्फ इतना था
उसने तुम्हारी फेक्टरी के बने
नकली दवा खाई थी
इक तो पैसे नहीं थे ,
दवा के लिए
जैसे -तैसे पैसे बटोरे
और उसे दवा खिलाई ,
अब मर गया है -
कफ़न के लिए पैसे कहाँ से लाऊं -
कुछ तो इंसाफ किया होता
नकली दवा में कुछ और मिलाया होता ,
मरने के बाद उसकी लाश भी ना बचती
और वह गल गया होता
कम से कम मुझ बदनसीब बाप को ;
तेरे दरवाजे पर
अपने बेटे के मौत के बदले
कफ़न ना मांगना पड़ता



Friday, October 8, 2010

प्यार

जिन्दगी
अब कितनी हंसी ,
खूबसूरत
लगने लगी है --
यकीं मानिये
जब से
आई हो --
जीवन में तुम
अब हमें भी
आपकी तरह
अपने आप से
प्यार करने को
जी चाहता है ।

Wednesday, October 6, 2010

अपरिग्रह

जैन दर्शन में अपरिग्रह का बहुत महत्व है । त्याग से इसका सीधा सम्बन्ध है । मैंने इसे इस प्रकार से परिभाषित किया है ---


अपरिग्रह
++++++++++++++

जो चीज अपनी नहीं , उसका मोह कैसे

Tuesday, October 5, 2010

मौत

इंसान !
एक मौत
से बचने के लिए
हजारों कोशिशें
करता है
और
जिन्दा रहते हुए भी
हजारों बार
मरता है

Thursday, September 30, 2010

इंसानियत


-------------------------------
इंसानियत के बिना
इंसान
शैतान कहलाता है ।
इंसानियत ही
इंसान को
भगवान बनाता है

चित्र गूगल से साभार ।

( अमन की बात चरों तरफ हो रही है , इसलिए इस कविता को फिर से प्रकाशित कर रहा हूँ । )

Wednesday, September 29, 2010

पर्यावरण संतुलन की जननी है -- शेरनी




ईक्कीसवीं सदी में
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में ,
शेरनी के अस्तित्व से
बाईसवीं सदी में
ईन्सान के सुखद
अस्तित्व की कल्पना
की जा सकती है।

( यह चित्र मेरी पुत्री एवं मेरे भतीजे ने जून २०१० में नेशनल पार्क में ली है )


Saturday, September 11, 2010

ईद मुबारक हो आप सभी को और अली साहब को भी

पवित्र रमजान माह में
एक दिन
चाँद लेकर आता है ,
ईद की खुशी
खुदा से गुज़ारिश है -
आपके जीवन को
अपने नूर से भर दे
और हर लम्हां ,
खुदा आपके साथ हो

Monday, September 6, 2010

हिरन



जंगल की सन्नाटा में
चारों ओर खामोशी है ,
खामोशी को चीरती
हिरन की उपस्थिति ,
बयां कर रही है ,
चंचलता -
जंगल की ।


( देशाटन ने ही मुझे बहुत सी सीख दी है । हिरन का यह चित्र मेरे द्वारा २५.६.२०१० को बांधवगढ़ नेशनल पार्क में , जो मध्य प्रदेश मे उमरिया जिले मे है ,लिया है । )

Thursday, September 2, 2010

तीर

हमने वक्त के
बदलते रूख को
पहचान लिया है ,

अब
इंतजार के तेरे
तीर -
हमें घायल नहीं -
कर सकते ।

Wednesday, September 1, 2010

छत्तीसगढ़ का वृन्दावन है -छुईखदान

प्रकृति की गोद में
मैकल की पहाड़ियों के करीब बसा है ,
मेरा गाँव
आओ आज मै तुम्हें
अपने गाँव के बारे में कुछ बताऊँ -
अपने गाँव की हवा ,पानी ,मिट्टी का
कुछ क़र्ज़ चुकाऊं
कई रियासतों में एक सरल रियासत थी
छुईखदान ,
राज किया बैरागियों ने
छुईखदान में ,
शहीदों की नगरी है -
छुईखदान ,
भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर की बनावट को देखकर
अक्सर बुजुर्ग कहा करते हैं --
छत्तीसगढ़ का वृन्दावन है -
छुईखदान

Monday, August 30, 2010

प्रकृति की अदभुत निगाहें

प्रकृति ने
"आंवला " और " तेंदू "
दोनों को
विटामिन -सी प्रचुर मात्रा मे दी है
किन्तु
आंवला को ज्यादा सुंदर बनाया है ,
यदि तेंदू भी सुंदर होता ,
आंवले की तरह
अमीर जरूरत ना होने पर भी
उसे खरीद लाते
फिर गरीब विटामिन -सी
कहाँ से पाते।

आंवला और तेंदू दो फलों के माध्यम से प्रकृति ने मुझे सीख दी है ,उसे में अमीरों के अवांछित संचय पर ध्यान आकर्षित कराकर , प्रकृति की इस महानता पर लोगों की निगाहें ले जाना चाहता हूँ , कि प्रकृति ने अमीर से ज्यादा गरीबों पर ध्यान दिया है , और सूरत से ज्यादा सीरत पर जोर दिया है

Wednesday, August 25, 2010

कीमत

हरतरफ रौशनी से
घिरे हैं हम ,
रौशनी की कीमत -
क्या बताये हम
कभी जाके पूछो उनसे ,
जो अंधेरों की दुनिया को
रौशनी की दुनिया समझकर
जीते हैं ---
एक -रौशनी यदि
मिल जाये उन्हें
तो अँधेरे की दुनिया का
रास्ता कहाँ से लाये वो .

Thursday, August 12, 2010

काल के साथ बात का अर्थ बदलता है

कल का वर्तमान
आज जो अतीत है ,
कल कुछ और कहता था --
आज कुछ और बता रहा है
आज का वर्तमान
जो कल अतीत होगा ,
कल के वर्तमान को
कुछ और बताएगा

jeet

जीत
सिर्फ
पा लेना
नहीं है ,
यदि हमें
नया रास्ता
दिखता है --
और हम उसपर
चल पडतें हैं ,
तो यह भी
हमारी
जीत है


( अहसास की कविता पर जब मैंने श्री सनु शुक्ला की प्रतिक्रिया पढकर उनका ब्लॉग देखा , तब मुझे उनकी यह बात अच्छी लगी की , चाहत , पाने से ज्यादा दिल की खुशी है , उसी पल मेरे मन में विचार आया और मैंने उक्त कविता लिख दी । अब आप ही बताइए आप जीत के रास्ते पर चल पड़े हैं या नहीं । धन्यवाद । )

Wednesday, August 11, 2010

अहसास

हर माँ को
उसके बच्चे की निगाहें
तलासते रहती है
कहीं शून्य में ,
माँ नज़र जाये -
और अहसास दिला जाये
हाँ बेटा , मैं तेरे करीब हूँ ,
तू सो जा ---
किन्तु माँ कहती है
मुझे अभी नींद नहीं आयेगी -
क्योंकि तेरे दर्द का अहसास
मेरे सीने में जिन्दा है ,
उसके बुझने के बाद
मैं सोऊंगी --
चाहे लाख बरस जागना पड़े ,
मै जागते हुए उसके बुझने का
इंतजार करूंगी --
तू मेरी फ़िक्र मतकर
में जागते हुए --
तेरी नींद के अहसास में
गहरी नींद सो लूंगी .

Monday, August 9, 2010

चित्र भी एक सीख दे गई

बनाया है इस चित्र को ,
मेरी हमसफ़र ने ,
प्रकाशित नही कर रहा हूँ ,इसे इसलिए यहाँ -
लगी किसी को टोपी अच्छी , लगी किसी को झोपड़ी ;
लगी किसी को मुस्काराहट अच्छी ;
पर देखा जब मैंने बनते चित्र को ,
अंगुली में रुके ब्रुश को उस वक़्त तक ,
चलने का इशारा नहीं दिया जब तक मन ने मष्तिष्क को ;
बीत गए कई पल , चली नहीं अंगुली एक कदम ;
पढ़ाया पाठ धीरज का मुझे
बनकर चित्र


(निकिता ने जानना चाहा पेंटिंग किसने बनाई है ,चित्र मेरी हमसफ़र माने मेरी पत्नी श्रीमती संजू सांखला ने )

Sunday, August 8, 2010

एक बात दिल से --एक आस ------एक पल के लिए

हर पल
समर्पण में
बिताऊंगा ,
उधेड़बुन से निजाद
पाऊंगा ।
एक पल अब
उनके साथ ,
सुकूँ से
बिता पाउँगा ।


( कल की एक कविता के सम्बन्ध में अली साहब की समालोचात्मक प्रतिक्रिया - सुकूँ --शब्द ने आज
की कविता को जन्म दिया है । और प्रकृति की सीख को उजागर किया है ----मेरे शब्दों में -----
------हर पल
प्रकृति सीख दे जाती है ,
सुकूँ शब्द ने
उधेड़बुन से
निजाद पाने
पाने की सीख दी है ,
वह भी तो अली -साहब
की कलम से ,
प्रकृति की
सीख ही तो है । ------

Saturday, August 7, 2010

दिल की बात --हमसफ़र के लिए -----एक पल

एक पल
उनके साथ
होने को जी चाहता है ।
एक पल
सुकून का
बिताने को जी चाहता है ,
हर पल मेरा
उधेड़ - बुन में
लगा है -----
वह एक -पल ,
समर्पण का
लाऊँ कहाँ से ।

Thursday, August 5, 2010

मेरा प्यारा गाँव छुईखदान

इस ब्रम्हांड मै ,
प्यारी हमारी धरती मां
इस धरा के खूबसूरत देश --हिन्दुस्तान
की धड़कन में बसा
छत्तीसगढ़ राज्य है ।
छत्तीसगढ़ का शालीन
जिला राजनांदगाँव
की आत्मा में बसा
मेरा प्यारा गाँव छुईखदान है ।
पीली छुई जो घरों को संवारती है
उसी छुई के खदान ने नाम दिया है -
मेरे गाँव को छुईखदान ।

Tuesday, August 3, 2010

विश्वास

तू नहीं मिली मुझे
जमीं पर ,
खोजता फिरू ---
अब तुझे --
मगर कहाँ ,
आसमां के उस पार
या जमीं के अंदर ,
लगता नहीं
मिलन होगा ---कभी अपना
फिर भी मुझे -
विश्वास है ----
मन में ।

Saturday, July 31, 2010

खूबसूरत ----

तू खूबसूरत
तेरी हर अदाएं खूबसूरत
तेरी चाल खूबसूरत
तेरी आँखें खूबसूरत ।

ऐ खूबसूरत -
जरा देख ईधर
मैं बदसूरत -
तेरे दिल की तरह ,
मेरा दिल खूबसूरत तेरी तरह ।

मेरा दिल तूने जलाया है
बदसूरत इसे बनाया है
दोनों का दिल बदसूरत ,
अब दूरी क्यूँ खूबसूरत ।

Tuesday, July 27, 2010

कब्र

जिन्दा
लाशों की
कब्र
का प्रतीक,
कर्फ्यु ग्रस्त
शहर का
हर
चौराहा ।

( चित्र गूगल से साभार )

Sunday, July 25, 2010

चौराहा







(चित्र गूगल से आभार । )

मैं दो राहे
पर नहीं ,
चौराहे पर
खड़ा हूँ ।
दो राहे पर
तो एक रास्ता -
जिन्दगी को
तो दूसरा रास्ता
मौत को जाता है ।
चौराहे पर
एक रास्ता
जिन्दगी से बड़ा
तेरा साथ है ,
तो दूसरा
मौत से बड़ी
तेरी जुदाई का
रास्ता है ।

Friday, July 23, 2010

माँ माने-----

जब
सारे
दोस्त ,
और
अपने ---
मुह मोड़ ले ----
तब
माँ --माने
दोस्ती का अहसास ।

Thursday, July 22, 2010

याद

-----------------------
आज
याद
क्या आई
उनकी ,
कब्र -
से उठ कर
आंसू
बहाने लगे ।
-----------नीलम---

Tuesday, July 20, 2010

सजा

किसी की गल्ती की
इतनी सजा ,
ना दे --' नीलम '
कहीं उस बदनशीब
के पास पश्चाताप ,
के लिए -
दो वक्त ,
भी ना हो ।

Sunday, July 18, 2010

रफ़्तार

इन्सान जिस तेज रफ़्तार से
आसंमा की ओर
बढ़ रहा है ,
उससे कहीं -
तेज रफ़्तार से वह ,
प्यार , दर्द और अपनापन
भूलता जा रहा है ।

Sunday, July 11, 2010

खुशियाँ

क्यूँ
हम
खुशियाँ पाने
दर - दर
भटकते हैं ,
प्रकृति
की गोद में
जाकर बैठो
और
देखो
कितनी
खुशियाँ
संजोये
बैठी है
हमारे लिए ।







चित्र गूगल से साभार

Saturday, July 10, 2010

मुकेश माथुर - श्रधांजलि

मुकेश
कोई शब्द नहीं
अनुभूति है दर्द की ,
वो गीत ही क्या ,
जिसमे कशिश नहीं ,
वो आवाज ही क्या
जो मुकेश की नहीं

मुकेश मेरा प्रिय गायक है । मुझे मुकेश के गीत बचपन से प्रिय है , क्योकि उनके गीत सिर्फ गीत नहीं बल्कि गीत मुझे प्रकृति से है जोड़ा है और जीने की कला भी दी है
हरी - भरी वसुंधरा ,है नीला -नीला ये गगन , ये किस कवि की कल्पना , ये किस कवि की कल्पना ये कौन चित्रकार है ....
प्रकृति का इतना सुंदर चित्रण मुकेश की आवाज का जादू नहीं ,तो और क्या है । मेरे गाँव छुईखदान में Dauram महोबियाजी का एक टूरिंग टाकीज था , उस टाकीज मेफिल्म चालू होने के ठीक पहले आरती का गीत बजता था और उसके ठीक पहले मुकेश का एक गीत बजता था , मेरे घर के छत से अक्सर में वो गीत सुनता था ----चल -अकेला , चल -अकेला -तेरा मेला छूटा राही , तू चल अकेला -------मुकेश ने उस गीत को इस अंदाज मे गया है , जिससे जीवन दर्शन का सहज रूप मे अहसाश हो जाता है । इस लिए मैं कहता हूँ , मुकेश के गाये गीत मेरे लिए जीवन दर्शन की एक राह है ।

Friday, June 18, 2010

Tuesday, March 30, 2010

फासला


गरीब और अमीर
के बीच
उतना ही
फासला है ,
जितना --
जिन्दगी और मौत
के बीच ।
अमीर जिन्दगी -
चाहता है ,
और गरीब मौत -
किन्तु
ना अमीर जी पाता
और ना गरीब मर पाता
चित्र गूगल से साभार

Wednesday, February 24, 2010

गुलाब एक फूल

गुलाब
एक फूल
यदि इन्सान की तरह ,
सोंचता -
तो शायद ,
इतना खिला , सुगन्धित
कभी नहीं होता।
फूल भी -
अपने जिस्म में
इन्सान की तरह,
जहर घोलने लगता
जो निश्चित ही उसे
जड़ से खोखला कर

गमले से गिरा देता
(चित्र गूगल से आभार ।)

Sunday, February 7, 2010

हमसफ़र

मैंने
जीवन के सफ़र में
उस रोज से
तुम्हें
अपना हमसफ़र
मान लिया है ,
जब मैंने
तुम्हे नहीं ,
तुम्हारी -
परछाई को देखा था ।

------------------नीलम ----------

Saturday, February 6, 2010

धापी नीड़

" *धापी नीड़ "
माने
माँ के आँचल तले बसकर
माँ के गोद में पलना है
और कुछ नहीं ।

* धापी मेरी माँ का नाम है।

नीड़


नीड़
-----------------
नीड़ माने सिर्फ ,
घोसला नहीं ।
नीड़ माने सिर्फ
बसेरा नहीं ।
नीड़ माने -
माँ के आँचल तले
बसेरा है ।
(यह चित्र गूगल से साभार )


-------------------

Friday, February 5, 2010

प्रकृति

विधाता का
सुन्दर सृजन है -
प्रकृति।
प्रकृति की उपहार है -
माँ॥
माँ ही प्रकृति है ,
प्रकृति ही माँ ॥