nature7speaks
its about nature basically,but have other related poetries ...i m sure when u'll read it u'll find ur innerself more open and closer to urself.....u'll then start appreciating the small things around u!!!have faith!!! a little description of prakriti by me goes as विधाता का सुन्दर सृजन है - प्रकृति। प्रकृति की उपहार है - माँ॥ माँ ही प्रकृति है , प्रकृति ही माँ ॥ -नीलम चंद सांखला
Wednesday, June 19, 2013
माँ की याद ः १९-०६-१९८८ स्े १९-०६-२०१३
माँ
की २५वीं पुण्यतिथि में...
माँ
की याद
अपनी
निगाहों से हरदम
मेरा
ख्वाब सजाने वाली,
ख्वाबों
की दुनिया को
हकीकत
बनाने वाली ।
२५
बरस पहले देखा था तुम्हें,
आज
हर पल मेरी निगाहों में बसने
वाली ।
बरसों
पहले गोद में तेरे
बिताये
थे चंद लम्हें,
आज
तेरी यादों के गोद में
हर-पल जिये जा रहा हूँ ।
बरसों
पहले तुम्हारे हाथों से
माथे
को सहलाने का
अहसास
है मुझे,
अब भी
यकीं
नहीं तो देख ले 'नीलम
' मेरे सर के उपर हरदम
तेरे
हाथ का साया है,
माँ
।
Sunday, June 16, 2013
chalana hee jivan hai
चलना ही जीवन है
सिर्फ चलते चले जाओ ....
हर कदम मंजिल करीब आयेगी .
प्लान बनाकर चलते चले जाओ ...
एक कदम मंजिल और करीब आयेगी .
बिना स्वार्थ के चलते चले जाओ ....
हर कदम सफलता के मंजिल तक पहुंचायेगी .
जीवन का एक कदम दूसरों के लिए बढ़ाओ ...
मंजिल में पहुचना सार्थक हो जायेगी .
सिर्फ चलते चले जाओ ....
हर कदम मंजिल करीब आयेगी .
प्लान बनाकर चलते चले जाओ ...
एक कदम मंजिल और करीब आयेगी .
बिना स्वार्थ के चलते चले जाओ ....
हर कदम सफलता के मंजिल तक पहुंचायेगी .
जीवन का एक कदम दूसरों के लिए बढ़ाओ ...
मंजिल में पहुचना सार्थक हो जायेगी .
Wednesday, June 12, 2013
Sunday, May 12, 2013
mother's day
बच्चों की निगाहें
हरदम
शून्य में
निहारते रहती है
माँ को ।
क्योंकि
माँ की स्वप्निल निगाहें
हर लेती है
हर दुखों को
बच्चों की ।
हरदम
शून्य में
निहारते रहती है
माँ को ।
क्योंकि
माँ की स्वप्निल निगाहें
हर लेती है
हर दुखों को
बच्चों की ।
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Sunday, May 5, 2013
SNOW
Posted by
neelam chand sankhla
at
8:44 PM
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